पडरौना। फाल्गुन पूर्णिमा पर होने वाले होलिका दहन का इस बार विशेष ज्योतिषीय महत्व है। दो मार्च को रात्रि पर्यंत भद्रा रहने के कारण होलिका दहन भद्रा के पुच्छ काल में ही किया जाना शुभ रहेगा। यह शुभ मुहूर्त रात्रि 12:50 बजे से 2:02 बजे के मध्य रहेगा।
विजयपुर दक्षिण पट्टी निवासी ज्योतिषाचार्य पंडित राजकिशोर मिश्र ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा दो मार्च को शाम 5:18 बजे से प्रारंभ होकर तीन मार्च को शाम 4:33 बजे तक रहेगी। सूर्यास्त 5:46 बजे होगा। शास्त्रों के अनुसार प्रदोष काल में, भद्रा रहित पूर्णिमा में होलिका दहन करना श्रेष्ठ माना गया है। यदि भद्रा का प्रभाव हो तो उसके मुख काल का त्याग कर पुच्छ काल में दहन करना चाहिए। भद्रा के मुख में होलिका दहन को अशुभ बताया गया है। उन्होंने बताया कि तीन मार्च को चंद्र ग्रहण रहेगा, जबकि चार मार्च को चैत्र कृष्ण प्रतिपदा के दिन होली (बसंत उत्सव) मनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक परिवार सदस्य को होलिका में घी में भिगोई दो लौंग, एक बताशा और एक पान का पत्ता अर्पित करना चाहिए।