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Deoria News: रुद्रपुर की माटी में दबा है छठी शताब्दी ईसा पूर्व का इतिहास

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रुद्रपुर। पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व के रुद्रपुर क्षेत्र की माटी में छठी शताब्दी ईसा पूर्व का इतिहास दबा है। यहां के सहनकोट परिक्षेत्र से 2500 वर्ष पुरानी मुद्रा मिलने के बाद प्राचीन इतिहास में शोध कर रहे छात्रों की दिलचस्पी बढ़ गई है। इनमें से तमाम अनुसंधानकर्ता ने अमर उजाला से संपर्क कर पंचमार्क सिक्का प्राप्त होने के स्थान की जानकारी ली।
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उन्होंने भारत सरकार के पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित क्षेत्र की सुरक्षा बढ़़ाने और इस क्षेत्र में अनुसंधान तेज कराने की मांग की। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय प्राचीन इतिहास विभाग के शोध छात्र रतन पाठन ने कहा कि रुद्रपुर अब तक के उत्खनन और सर्वेक्षण से कुषाण काल तक का सफर तय कर पाया है। यदि इस क्षेत्र में पंचमार्क सिक्के मिल रहे हैं, तो इसका इतिहास मौर्य काल से भी प्राचीन प्रतीत हो रहा है। जिस क्षेत्र में सिक्के मिले हैं, उसके विस्तृत उत्खनन से शोधार्थियों को दुर्लभ इतिहास की जानकारी मिलेगी।
समाजसेवी शिवहरि त्रिपाठी ने कहा कि सुरक्षा और संरक्षण के अभाव में प्राचीन धरोहरें नष्ट हो रही हैं। यहां पांच किलोमीटर में फैले सहनकोट परिक्षेत्र को भारत सरकार का पुरातत्व विभाग सिर्फ बोर्ड लगाकर संरक्षित किया है, जबकि इस क्षेत्र में नए निर्माण और अवैध खुदाई होने से इसकी प्राचीनता नष्ट हो रही है।
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बाबा राघव दास भगवान दास पीजी कॉलेज बरहज के प्राचीन इतिहास विभाग के प्रोफेसर डॉ. सज्जन कुमार गुप्त ने कहा कि रुद्रपुर में बेशकीमती धरोहरों को संरक्षित करने के लिए एक संग्रहालय बनना चाहिए। उन्होंने भारत सरकार से रुद्रपुर में पौराणिक महत्व के दुग्धेश्वरनाथ मंदिर और ऐतिहासिक सहनकोट में मिली प्राचीन वस्तुओं को संरक्षित करने के लिए संग्रहालय बनवाने की मांग की।
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