उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायमूर्ति सुधीर सक्सेना ने जिला जज के साथ जिला कारागार का निरीक्षण किया। बंदियों की समस्याओं को सुना। लोक अदालत से फायदे, निशुल्क अधिवक्ताओं की उपलब्धता के बारे मेें जानकारी जुटाई। क्षमता से अधिक बंदियों के जेल में रहने के बाद बेहतर सुविधा के जेल प्रशासन को शाबासी मिली।
शुक्रवार को उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायमूर्ति सुधीर सक्सेना, जिला जज राजाराम, सीजेएम त्रिलोक पाल सिंह जिला कारागार पहुंचे। बंदियों से बातचीत के दौरान जेल में बंदियों को मिलने वाले निशुल्क पैरवी के बारे में जानकारी मांगी। कितने बंदियों को इसका लाभ मिला।
जिला जेल में बंद दूर के बंदियों को निशुल्क पैरवी में कोई परेशानी तो नहीं हो रही। लोक अदालत से कितने लोगों को लाभ मिला। छोटे मामलों में कितने बंदी जेल से छूटे। निरीक्षण के दौरान महिला बंदियों से मुलाकात कर उनका भी हाल जानने का प्रयास किया गया।
जेल में बंद महिलाओं ने बताया कि फर्जी तरीके से दहेज उत्पीड़न में उन लोगों को फंसाया जा रहा है। उनकी बातों को गौर से सुना और उनकी बातों पर विचार करने की बात कहीं। बैरकों का निरीक्षण, सफाई और भोजन की व्यवस्था, ठंड में अलाव सहित अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी मांगी गई।
बताया जाता है कि पहली बार किसी प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने जेल का निरीक्षण किया। जेल के इंतजाम पर संतोष जताया। करीब एक घंटे जेल में रहने के बाद सभी चले गए। जेल अधीक्षक रंग बहादुर पटेल ने बताया कि निरीक्षण में सब कुछ सामान्य रहा। बंदियों के बारे में और उनकी सुविधाओं की समीक्षा की गई।