फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बीमारी ने किया लाचार, दो वक्त की रोटी के मोहताज

Sat, 14 May 2016 11:35 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला/ देवरिया
विज्ञापन
विज्ञापन
इसे अपनों की बेरूखी कहें या वक्त की नजाकत। कभी उनकी शहनाई से महफिलें गुलजार होती थी। लोग तारीफ में कसीदें गढ़ते थे। आज वह शख्स दो वक्त की रोटी का मोहताज है। बरहज नगर के सभासद मोहनलाल बाल्मिकी आर्थिक तंगी के चलते इलाज नहीं करा पा रहे हैं। शारीरिक रूप से लाचार और मुफलिसी ने उन्हें दो जून की रोटी तक का मोहताज बना दिया।
विज्ञापन


मोहन शहानाई के नाम से मशहूर अब उनकी कोई सुध लेने वाला भी नहीं है। लकवा रोग से ग्रस्त बिस्तर पर असहाय पड़े मोहन चाचा अपनी दर्द भरी दास्तां सुनाकर शनिवार को फफक पड़े। नेक दिल व बेबाक होने के चलते जनता ने उन्हें वार्ड नंबर छह से सभासद चुना। उन्होंने अब तक बोर्ड की बैठक में महज दो बार ही हिस्सा लिया है। बीमारी और आर्थिक तंगी ने उन्हें तोड़ दिया है। वह कहते हैं कि बिस्तर पर ही दो वर्ष गुजर गए। दवा में सब कुछ खत्म हो गया।

पैसे के अभाव में छह महीने से दवा बंद है। जिंदगी अब दूसरों के सामने हाथ फैलाने पर चल रही है। बताते हैं कि जब से बीमार पड़ा तब से कोई हाल जानने तक नहीं आया। गुजारा करने के लिए एक राशन कार्ड भी था, वह भी कोटेदार ने अपने पास रख लिया। इसके कारण कभी राशन नहीं मिला। वह कहते हैं कि भगवान ने भी उनके साथ क्रूर मजाक किया। पांच संतानों में तीन को असमय उठा लिया। बची दो संतानों में एक दमा का मरीज तो दूसरा मानसिक दिव्यांग है। वह कहते हैं कि नगर पालिका प्रशासन या तहसील प्रशासन ने भी उनकी सुध नहीं ली।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें