श्रवण जांच मशीन खराब, जांच के लिए भटक रहे मरीज
मेडिकल कॉलेज में कान के सुनने की दिक्कत से पीड़ितों का नहीं हो पा रहा समुचित इलाज
प्राइवेट में अधिक कीमत देकर करानी पड़ रही जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज के कान के सुनने की दिक्कत से पीड़ित मरीजों की जांच ठप होने से समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है। श्रवण शक्ति जांच के लिए लगी मशीन तकरीबन चार माह से अधिक समय से खराब पड़ी है। इससे मरीजों को उपचार के लिए भटकना पड़ रहा है। पीड़ितों को जांच के लिए महानगरों व प्राइवेट अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
अस्पताल के नाक, कान, गला की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी है। यहां मरीजों की लंबी कतार लग रही है। हर रोज तकरीबन डेढ़ सौ से अधिक मरीजों का उपचार होता है। अस्पताल में कान से कम सुनाई देने, कान में सीटी जैसी आवाज सुनाई देने से पीड़ित करीब दस से बारह लोग पहुंचते हैं। कान की नस सूखने से लोगों को दिक्कत आती है। इसके लिए पीटीए जांच कराई जाती है। इसकी जांच की सुविधा अस्पताल में है।
अलग से एक साउंड प्रूफ कमरा बना है। तथा ऑडियो मेट्री मशीन व इंपिडेस मशीन भी है, लेकिन चार माह से मशीन खराब पड़ी है। इसकी जानकारी प्राचार्य से लेकर अन्य अधिकारियों को है लेकिन अब तक मशीन ठीक नहीं हो सकी है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
जिले के दूर-दराज क्षेत्रों से आने वाले बुजुर्ग लोगों की जांच नहीं हो पा रही है। श्रवण शक्ति की जांच न होने से पता नहीं चल पा रहा है कि बीमारी दवा से ठीक होगी कि मशीन लगाना पड़ेगा। वहीं, इस तरह के मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जा रहा है। कुछ लोग कर्मचारियों से सवाल जवाब करते हुए जांच केंद्र पर पहुंच जा रहे हैं, जहां बंद मिल रहा है।
ये होती हैं जांचें
ऑडियो मेट्री मशीन से श्रवण शक्ति की जांच होती है। साथ ही कान में आवाज सुनाई देने, चक्कर आने की जांच होती है। वहीं, इंपिडेस मशीन से कान के पर्दे, कान की हड्डी, यूटेसियन ट्यूब फंगस, इंफेक्शन की जांच होती है।
कोट
अस्पताल में श्रवण शक्ति की जांच की सुविधा है। कुछ दिन से मशीन में खराबी आ गई है। नई मशीन मंगाने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही मशीन आ जाएगी। इसके बाद जांच शुरू हो जाएगी।
-डॉ. एचके मिश्रा, चिकित्सा अधीक्षक