फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Deoria News: बरहज आश्रम में बनती थी रणनीति, बाबा राघवदास से लेते थे प्रेरणा

Sat, 08 Aug 2026 12:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
विज्ञापन
विज्ञापन
बरहज। भारत छोड़ो आंदोलन में बरहज के अनंत आश्रम के दूसरे पीठाधीश्वर बाबा राघवदास का बड़ा योगदान था। इस क्षेत्र के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बरहज आश्रम में गुप्त बैठकें कर आंदोलन की रणनीति बनाते थे। पढ़ाई के दौरान बाबा राघवदास के संपर्क में आने के बाद मईल क्षेत्र के आचार्य केशव चंद्र मिश्र स्वतंत्रता के आंदोलन में सक्रिय हुए थे।
विज्ञापन

अंग्रेजों भारत छोड़ो के आह्वान पर बरहज के मुख्य चौक पर पंडित विश्वनाथ मिश्र और जगन्नाथ मल ने तिरंगा फहराया था। मईल के बगहा गांव निवासी पंडित वृंदा प्रसाद के पुत्र केशवचंद्र मिश्र ने बाबा राघवदास का सानिध्य प्राप्त होने पर पढ़ाई के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में भी हिस्सा लिया। वे बनारस में पंडित मदनमोहन मालवीय के संपर्क में आए और छात्र नेता के रूप में कार्य करने लगे। 10 अगस्त 1942 को बनारस में छात्रों के जुलूस का नेतृत्व कर रहे केशवचंद्र मिश्र को गोली लगी थी, फिर भी वह पीछे नहीं हटे थे। इन्होंने सागर विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर और शिक्षा विभाग में डीआईओएस स्तर की नौकरी का ऑफर ठुकरा दिया था।
स्वतंत्रता सेनानियों ने भी झेला है अंग्रेजों का दमन
1942 के आंदोलन के दौरान स्वतंत्रता सेनानी विश्वनाथ को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर गोरखपुर जेल भेज दिया था। बताया जाता है कि उन्होंने अंग्रेज अधिकारियों के समक्ष सिर झुकाने से इंकार कर दिया था।
विज्ञापन

इस दौरान बरहज तहसील क्षेत्र के गोड़वली गांव निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वामीनाथ प्रजापति भी सक्रिय थे। उन्होंने रामजानकी मार्ग स्थित पिपरा बांध पुल काट कर अंग्रेजों के आवागमन और संसाधनों के परिवहन पर रोक लगा दिया था। जिन्हें अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर सजा सुनाया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें