-दहेज रहित शादियों के साक्षी बन रहे भोलेनाथ
-दुग्धेश्वरनाथ मंदिर पर हर मुहूर्त पर हो रहा विवाह
सुरेंद्र वत्स
रुद्रपुर। पूर्वांचल में दहेज प्रथा जैसी कुरीति पर करारा प्रहार होने लगा है। दुग्धेश्वर नाथ मंदिर पर इधर विवाह के हर मुहूर्त पर दहेज रहित शादियां हो रही हैं। मंदिर पर शादी करने वाले अधिकांश जोड़े हरियाणा और पूर्वांचल के रहने वाले है। पूरब की दुल्हनों को हरियाणवी दुल्हा पसंद आ रहा है।
मंदिर के महंथ विजय शंकर महराज के सानिध्य में हरियाणा प्रांत के रहने वाले सुग्रीव और अकटहियां गांव की रहने वाली दुर्गा सोमवार को दुग्धेश्वरनाथ को साक्षी मानकर परिणय सूत्र में बंध गए। उन्होंने भगवान भोलेनाथ को साक्षी मानकर जन्म जन्मांतर तक एक दूसरे का साथ निभाने के लिए सात फेरे लिए।
पूर्वांचल में दहेज का प्रचलन बढ़ने से कमजोर और गरीब माता पिता के लिए बेटियां बोझ बनती जा रही हैं। उन्हें बेटी की शादी करने के लिए भारी कर्ज लेना पड़ रहा या कोई जमीन का टुकड़ा हटना पड़ रहा। बेटियों की शादी के बाद कर्ज के बोझ तले दबकर गरीबों का जिंदगी तबाह हो रही है। हरियाणा प्रांत से लड़की तलाशने आ रहे लोग बिना दहेज की शादी कर दुल्हन को अपने गांव ले जा रहे हैं। क्षेत्र के करमेंल बनरही, बड़हरा, माहीगंज, मटियरी आदि गांवों में करीब एक दर्जन लड़कियों की शादी हरियाणा प्रांत में हो चुकी है। वह ससुराल में खुश हैं। जिन लड़कियों की शादी हरियाणा में हुई है, वे वहां काफी सुख पूर्वक जीवन बिता रही हैं।
बताया जा रहा है कि हरियाणा में पुरुष महिला की जनसंख्या के अनुपात में काफी अंतर होने से महिलाओं की आबादी कम हो गई है। इस कारण उस प्रांत के लोग दुल्हन तलाशने पूर्वांचल के जिलों देवरिया गोरखपुर महराजगंज, कुशीनगर में आ रहे हैं। मंदिर के महंथ विजय शंकर ने बताया कि भगवान शंकर के दरबार में गरीबों की बेटियों का हाथ पीला हो रहा है। विवाह के हर मुहूर्त पर मंदिर में दो चार शादियां जरूर हो रही हैं, जिसमें लड़का पक्ष अधिकतर हरियाणा का रहता है। (संवाद)