पूर्व कैबिनेट मंत्री हरिशंकर तिवारी की विधायक की पारी देवरिया जेल से शुरू हुई थी। उन्होंने देवरिया जेल में रहते हुए कांग्रेस के मार्कंडेय चंद को हराया था। इसके बाद जमानत पर छूटे और चिल्लूपार विधानसभा से पांच बार विधायक बने।
साल 1985 तक हरिशंकर तिवारी का नाम पूर्वांचल के बड़े माफिया में शामिल हो चुका था। सुरक्षा कारणों से उन्हें देवरिया जेल में निरुद्ध किया गया था। इसी बीच विधानसभा का चुनाव आया तो हरिशंकर ने जेल में रहते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से पर्चा दाखिल कर दिया। जेल में रहते हुए उन्होंने कांग्रेस के मार्कंडेय चंद को 21728 मतों से पराजित कर दिया।
इस तरह उनकी राजनीति में इंट्री हो गई। विधायक बनने के बाद हरिशंकर तिवारी की जमानत हो गई। इसके बाद तो चाहे किसी भी दल की सरकार रही हो वह सरकार में शामिल होकर मंत्री बनते रहे। इतना ही नहीं जब उन पर कई आरोप लगे तो देवरिया उनका गढ़ माना जाने लगा। संवाद
... और सड़क पर उतर आए थे हरिशंकर तिवारी
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही लंबे समय बाद 2017 में तिवारी हाते पर पुलिस का छापा पड़ा था। उस वक्त यह छापा प्रदेश की सुर्खियों में था। छापा के बाद हरिशंकर तिवारी खुद सड़क पर उतरे और कलक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठ गए।
तिवारी के धरने पर बैठने के बाद पुलिस बैकफुट पर आ गई। बाद में पता चला कि जिस अपराधी की तलाश में पुलिस हाता गई थी, वह गैर जनपद के जेल में बंद था। इन सबके बीच 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तिवारी परिवार सपा की साइकिल पर सवार हो गया। पूर्व सांसद भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी, पूर्व विधायक विनय शंकर सपा में शामिल हो गए। इसी के साथ सपा की पूर्वांचल में बड़े ब्राह्मण चेहरे की तलाश भी पूरी हो गई। विनय शंकर के साथ उनके भांजे और विधान परिषद के पूर्व सभापति गणेश शंकर पांडेय भी सपा में शामिल हो गए।
बड़े बेटे भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी को भी राजनीति में स्थापित किया
पंडित हरिशंकर तिवारी ने साल 2012 में राजनीति से संन्यास ले लिया था। इसके बाद उन्होंने अपने दोनों बेटों को राजनीतिक विरासत सौंप दी। छोटे बेटे विनय शंकर तिवारी को चिल्लूपार विधानसभा से विधायक बनवाकर विधानसभा भेजा तो बड़े बेटे भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी को साल 2007 के उपचुनाव में संतकबीरनगर से सांसद के रूप में जीत दिलवाई। साल 2009 में फिर उन्हें लड़वाया और जीत दिलवाई।
किसने क्या कहा...
पंडित हरिशंकर तिवारी और मैं कल्याण सिंह की सरकार में मंत्री थे। उनके निधन से पूर्वांचल की राजनीति में एक रिक्तता आई है। मैं उनको श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उनके परिवार को इस दुख कि घड़ी को सहन करने की भगवान से प्रार्थना करता हूं।
- शिव प्रताप शुक्ला, राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश
पंडित हरिशंकर तिवारी का निधन बेहद दुखदायी है। तिवारी ने विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद के सदस्य के रूप में विश्वविद्यालय के विकास में महती योगदान दिया था। ईश्वर उन्हें अपने निकट स्थान दें।
- रमेश कुमार मिश्र, पूर्व कुलपति, गोरखपुर विश्वविद्यालय
पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी का निधन अत्यंत दुखद है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति एवं शोक संतप्त परिवार को यह असीम दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। भावभीनी श्रद्धांजलि।
- अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी
यह मेरा सौभाग्य रहा है कि विधानसभा में उनके साथ बैठने का मौका मिला। सदन में हमेशा उनकी मौजदूगी रहती थी। प्रदेश की राजनीति में उनकी काफी पकड़ थी। वह पूर्वांचल के बड़े स्तंभ थे। उनके जाने से अपूर्णीय क्षति हुई है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और परिवार को दुख सहने की शक्ति दें।
- डॉ. राधा मोहन अग्रवाल, राज्यसभा सदस्य
हरिशंकर तिवारी शिक्षकों को बहुत सम्मान देते थे। वे गोरखपुर विश्वविद्यालय में 1994 से 1996 तक कार्य परिषद के सदस्य रहे। शिक्षकों की आवाज को सदन में जोरदार तरीके से उठाते थे। मेरे उनसे आत्मिक रिश्ते थे। उनकी कमी हमेशा खलेगी।
- प्रो. रजनीकांत पांडेय, पूर्व कुलपति, सिद्धार्थनगर विश्वविद्यालय
मैंने अपनी राजनीति की शुरूआत पूर्व मंत्री के मार्गदर्शन में की। वे छात्र नेताओं को बहुत स्नेह करते थे। यही कारण है कि गोरखपुर विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों के छात्रनेता तिवारी हाता में हमेशा जाते थे। उनके निधन से पूर्वांचल को बहुत बड़ी क्षति हुई है।
- राजेश पांडेय, भाजपा नेता
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहे वरिष्ठ नेता हरिशंकर तिवारी के निधन की खबर से स्तब्ध हूं। उनके निधन से गोरखपुर एवं पूर्वांचल की राजनीति की अपूर्णीय क्षति हुई है। चिल्लूपार से लंबे समय तक विधायक एवं मंत्री के रूप में उनके द्वारा किए गए विकास एवं जनसेवा के लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा। इस दुखद घड़ी में कांग्रेस पार्टी की संवेदना उनके परिवार एवं समर्थकों के साथ है।
-विश्व विजय सिंह, उपाध्यक्ष उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी