पुरूष सर्जिकल वार्ड में भर्ती मरीज
देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में झुलसे मरीजों के लिए अब तक बर्न वार्ड नहीं बना है। इसके चलते बर्न के मरीजों को सर्जिकल वार्ड में भी भर्ती कर इलाज किया जाता है। इसमें गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है।
सर्जिकल वार्ड में बर्न मरीजों के लिए जरूरी सुविधाएं भी नहीं हैं। यहां सामान्य तापमान पर ही मरीज वार्ड में रहते हैं। इसके चलते गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को मुश्किल होती है। महिला मरीजों को महिला सर्जिकल और पुरुष मरीजोंं को पुरुष सर्जिकल वार्ड में एक किनारे के बेड पर भर्ती कर दिया जाता है। संक्रमण से बचने के लिए मरीज के बेड पर एक मच्छरदानी लगा दी जाती है।
वहीं सर्जिकल वार्ड में पहले से ही ऑपरेशन और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीज भर्ती रहते हैं। जहां तीमारदारों की भारी भीड़ और आवाजाही लगी रहती है। ऐसे माहौल में झुसले मरीज को रखना से संक्रमण का खतरा अलग है। ऐसे मरीजों के लिए अलग वार्ड और एयरकंडीशनर जैसी बुनियादी सुविधाएं न होने से मरीजों के घाव ठीक होने अधिक समय भी लगता है। अगर मरीज गंभीर रूप से जला हुआ हो तो सर्जिकल वार्ड में रखने की जगह उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है।
यह स्थिति गरीब मरीजों के लिए और मुश्किल भरी हो जाती है। शहर के उमानगर निवासी अमित सिंह, जयंत आदि का कहना है कि मेडिकल काॅलेज बनने के बाद अलग बर्न वार्ड नहीं बन पाया।