न्यू काॅलोनी स्थित एक निजी अस्पताल में हंगामा की सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस
पुलिस ने आक्रोशितों को शांत कराते हुए बच्ची के शव को भेजा पोस्टमार्टम के लिए
- नवजात बच्ची के परिजनों ने डॉक्टर पर लगाया लापरवाही बरतने का आरोप
- भर्ती के दिन से ही बच्ची की हालत में नहीं हो रहा था सुधार, अस्पताल प्रशासन रोजाना कर रहा था पैसे की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। शहर की न्यू काॅलोनी स्थित एक निजी अस्पताल में रविवार की सुबह इलाज के दौरान दस दिन के नवजात शिशु की मौत हो गई। इसके बाद परिजन चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग करने लगे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को शांत कराकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों का आरोप था कि भर्ती के दिन से ही बच्ची की हालत में सुधार नहीं हो रहा था। इधर, अस्पताल प्रशासन रोज पैसे की मांग कर रहा था। डॉक्टर के कहने पर बच्ची के परिजनों ने पैसे के साथ तीन यूनिट ब्लड भी अस्पताल प्रशासन को उपलब्ध कराया था।
रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र के भालीचौर गांव निवासी सुनील निषाद की पत्नी को दस दिन पूर्व प्रसव पीड़ा हुई। इसके बाद परिजन उसे लेकर बैतालपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां उसने बेटी को जन्म दिया। 13 मई को जन्म के बाद नवजात की तबीयत बिगड़ी देख कर परिजन उसे शहर के न्यू काॅलोनी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराए। आरोप है कि नवजात की स्थिति में सुधार नहीं होने पर परिजनों ने उसे रेफर करने की बात कही, लेकिन चिकित्सक द्वारा उसकी तबीयत में सुधार होने की बात कहकर 90 हजार रुपये जमा करा लिए गए एवं तीन यूनिट खून की मांग की गई।
आरोप है 17 मई को परिजनों ने जब नवजात को रेफर करने की बात कही तो चिकित्सक ने परिजनों को डांट दिया। रविवार की सुबह चिकित्सक ने बच्ची को सीरियस होने की बात कह कर रेफर कर दिया, परिजन जब नवजात की नाड़ी व हाथ-पांव को हिला-डुला कर देखे तो उसकी मौत हो चुकी थी। नवजात की मौत के बाद परिजन हंगामा करना शुरू कर दिए।
वहीं, चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग करने लगे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को शांत कराकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
तीन दिन पहले ही जमा करा लिए 10 हजार रुपये, 50 हजार की कर रहे थे मांग
प्रसव के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर परिजन सीधे शहर स्थिति निजी अस्पताल में भर्ती कराए। परिजनों का कहना है कि बच्ची की स्थिति में कोई सुधार नहीं होने पर डॉक्टर से दो दिन के बाद रेफर करने की बात कही गई। इस दौरान अस्पताल प्रशासन ने 10 हजार रुपये जमा करवा लिया। तीन यूनिट ब्लड भी लिया गया। इसके बाद और पैसे की मांग करने लगे। इसके बाद जब मैंने 17 मई को रेफर करने की बात कही तो डॉट-फटकार लगाते हुए 50 हजार रुपये की और मांग कर दी गई। रविवार की सुबह सीरियस कर बच्ची को चिकित्सक ने रेफर कर दिया। बच्ची को हिला-डुला कर देखा तो उसमें कोई हरकत नहीं थी। जब हमलोगों ने विरोध जताया तो चिकित्सक व उसके स्टाफ ने जबरन अंगूठा लेने लगे। इसके बाद मेरे परिवार के सदस्यों को धमकाने लगे। कोतवाल वेद प्रकाश शर्मा का कहना है कि हॉस्पिटल पहुंच कर मामले को देखा गया है, परिजनों को शांत कराते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। तहरीर मिली है। मामला पंजीकृत करते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है।