देवरिया। देसी घी का सेवन शरीर को तंदरुस्त करने के लिए किया जाता है, लेकिन केमिकलयुक्त देसी घी का सेवन हानिकारक होता है। होली पर घी खरीदते वक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। यदि ऐसा नहीं किया तो फिर सेहत बिगड़ना तय है। जिले का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं होगा, जहां देसी घी के नाम पर खेल न होता हो।
होली में यह धंधा तेजी से पनपने लगता है। ब्रांडेड कंपनियों के नकली पैक भी मार्केट में उतार दिए जाते हैं। लोग नकली माल घर ले जाते हैं। त्योहार करीब आते ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग सक्रिय हो जाता है। छापेमारी की जाती है। अभी कुछ दिन पहले ही रोडवेज परिसर में एक क्विंटल नकली खोया पकड़ा गया था, लेकिन किस व्यक्ति ने बस में खोया रखा था, उसे विभाग अब तक नहीं खोज पाया है। कुछ ऐसा ही हाल देशी घी के साथ भी है। रातोरात मालामाल होने के चक्कर में नकली धंधे से जुड़े लोग बड़े शहरों से केमिकलयुक्त देसी घी काफी कम मूल्य में मंगा कर छोटे-छोटे कस्बों और गांवों तक पहुंचा रहे हैं। गांव की भोलीभाली जनता चमकदार पैक देखकर बहकावे में आ जाती है।
डॉक्टर डीके सिंह ने बताया कि मिलावटी देशी घी में अगर क्रोमियम मिला हुआ हो तो लीवर से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं। लीवर खराब हो सकता है। दिल की बीमारी भी हो सकती है। नकली घी के सेवन से मोटापा बढ़ने लगता है। सेहत से जुड़ी अन्य समस्याएं भी उत्पन्न होने लगती है। मिलावटी घी में जानवरों की हड्डियों का चूरा भी मिलाया जाता है। अगर नकली घी में जिंक मिलाया गया हो तो गर्भवती महिलाओं का गर्भपात हो सकता है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि घर पर बना घी का ही इस्तेमाल करें या फिर विश्वासपत्र दुकान से ही खरीदें।