महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज परिसर सामूहिक विवाह का बना साक्षी
दूसरे चरण में 236 हिंदू का विवाह 16 मुस्लिम जोड़ों का निकाह हुआ
कार्यक्रम में सदर सांसद, सलेमपुर सांसद के अलावा डीएम व एसपी ने नवदंपतियों के मंगल जीवन की कामना की
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। महाराजा अग्रसेन कॉलेज के परिसर में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में 252 जोड़ों ने एक दूजे का हाथ थामा। इसमें 23 जोड़े का विवाह हिंदू रीतियों से तथा 16 मुस्लिम जोड़ों का निकाह हुआ। इस मौके पर वर-वधू के परिवार के लोग एक साथ बैठे और रस्में पूरी हुईं तो बराती-घराती का माहौल बन गया।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में रस्में पूरी होने के बाद वर-वधुओं को प्रमाणपत्र व उपहार दिए गए। आयोजन समाप्त होने के बाद भी दोनों पक्षों के परिवारों के लोग आपस में मिलते रहे। वहीं, दूल्हे-दुल्हन के साथ सेल्फी लेने में लोग मगन थे। इस मौके पर जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने वर वधुओं का आशीर्वाद प्रदान किया।
अब बेटियों की शादी की चिंता भी नहीं : सांसद
सदर सांसद डॉ रमापति राम त्रिपाठी ने कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना से कई गरीब परिवारों के बेटे-बेटियों का विवाह भव्यता के साथ हो रहा है। पहले आर्थिक कठिनाइयाें की वजह से गरीब परिवारों को अपनी बेटियों की शादी का खर्च उठाने में परेशानी होती थी। इस योजना के चलते कई गरीबों के सपने साकार हुए हैं। सांसद सलेमपुर रविंद्र कुशवाहा ने कहा कि सरकार की योजनाओं के अंतर्गत 252 जोड़ों का एक साथ परिणय सूत्र में बंधना मुख्यमंत्री की इमानदार नीयत व कल्याणकारी नीति को दर्शाता है। डीएम अखंड प्रताप सिंह ने कहा कि यह यूपी सरकार की अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है। इसके माध्यम से एकसाथ 252 जोड़े एक साथ, एक ही मंडप में दांपत्य सूत्र में बंध रहे हैं। एसपी संकल्प शर्मा तथा मुख्य विकास अधिकारी प्रत्यूष पांडेय ने नवदंपत्तियों के सुखद भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में एमएलसी प्रतिनिधि राजू मणि, ब्लाॅक प्रमुख अनुभा सिंह, जिला विकास अधिकारी रविशंकर राय, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी कृष्णकांत राय, जिला समाज कल्याण अधिकारी जैसवार लाल बहादुर के साथ-साथ समस्त प्रखंड विकास अधिकारी मौजूद रहे।
...और दूल्हा नहीं बता पाया अपने पिता का नाम
सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से युवक व युवती कॉलेज परिसर में अपने परिजनों के साथ पहुंचे थे। इसी बीच विवाह मंडप में मौजूद एक जोड़े से उनके नाम व पता की जानकारी ली गई तो वे लोग सकते में आ गए। जब दूल्हा अपने पिता का नाम बता पाया तो उसे परिसर से बाहर कर दिया गया।
बलिया कांड का दिखा असर
सामूहिक विवाह बलिया में हुए फर्जीवाड़े के बाद सख्ती का असर भी दिखा। 278 जोड़ों ने विवाह का पंजीयन कराया था, लेकिन 252 जोड़ों ने एक साथ बैठकर रस्में पूरी की। समाज कल्याण विभाग ने 400 जोड़ों का विवाह कराने की तैयारी की थी, कई मंडप के पास रखे सामान काे उठाना पड़ा। कई जोड़े आए मगर दूल्हा या दुल्हन ने इन्कार किया तो वे वापस चले गए।