संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। एकौना में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को कथा व्यास डाॅ. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि भक्ति के द्वारा भगवान को वश में किया जा सकता है। भक्ति तीन प्रकार की होती है, तामसिक राजसिक और सात्विक।
तामसिक भक्ति किसी को ठगने या मारने के लिए होती है, राजसिक भक्ति संसार के विषयों को प्राप्त करने के लिए होती है और सात्विक भक्ति भगवान को प्राप्त करने के लिए होती है। किंतु सात्विक भक्ति से ऊपर भी एक भक्ति होती है, जिसे गुणातीत भक्ति कहते हैं।
पंडित श्रीप्रकाश मिश्र ने कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भगवान के गुणों का श्रवण होते ही भगवान के गुणों में विलीन हो जाती है और भगवान को वश में कर लेती है। कपिलदेव अपने माता देवहूति को निमित्त बनाकर सारे संसार को सांख्य दर्शन का उपदेश दिया जिसमें कहा कि मैं सम्पूर्ण प्राणियों की काया को अपना मंदिर बनाकर आत्मा के रूप में बैठा हूं।
इसलिए जो मेरे इस स्वरूप को मन से भुला देता है, इसका तिरस्कार करता है और पूजा का बडा भारी ढोंग करता है, उसपर मैं कदापि प्रसन्न नहीं होता। जो किसी भी प्राणी का अपमान करता है वह चाहे कितनी भी मुर्ति की पूजा करले मैं उसपर प्रसन्न नहीं होता क्योंकि मैं साक्षात प्राणियों के हृदय में बैठा हूं, इसलिए दूसरों का अपमान करने वाला मेरा ही अपमान करता है। जो समस्त चर अचर प्राणियों का सम्मान व दया करता है उसके बंधन मे पडकर उसके समस्त कामना की पूर्ति करके उद्धार करती है।
इस अवसर पर गंगाप्रसाद शुक्ल, हरिश्चन्द्र पाण्डेय, घनश्याम पाण्डेय, उदय प्रताप, नागेंद्र यादव आदि माैजूद रहे।