तरकुलवा। मातृ मंदिर सामाजिक सेवा केंद्र सोहनरिया के परिसर में श्रीमद्भगवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवे दिन बुधवार को कथावाचक शशिकांत ने कारागार में श्रीकृष्ण के प्रकट होने, पूतना उद्धार, इंद्र का मान मर्दन की कथा सुनाई।
उन्होंने कहा कि जब-जब पृथ्वी लोक में अधर्म बढ़ता है, भक्तों पर संकट आता है, तब-तब भगवान का अवतार होता है। भगवान अवतरित होकर भक्तों की रक्षा करते हैं और धर्म की स्थापना करते हैं। उन्होंने कहा कि द्वापर युग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज्य करते थे। पुत्र कंस ने उन्हें कारागार में डाल देता है और स्वयं राजा बन जाता है। उसने देवकी की आठवीं संतान के हाथों अपनी मृत्यु की आकाशवाणी सुनकर बहन और बहनोई को भी कारागार में डाल दिया।
भगवान श्रीकृष्ण ने आधी रात को कारागार में जन्म लिया। उनके जन्म लेते ही कारागार के कपाट स्वतः खुल गए और सभी सिपाही निद्रा में चले गए। वासुदेव के हाथों की बेड़ियां खुल गईं। उन्होंने नवजात बालक को यमुना पार कर यशोदा के घर पहुंचा दिया। कृष्ण को मारने के लिए कंस ने पूतना सहित कई रासक्ष-राक्षसियों को भेजा, प्रभु ने उसका भी उद्धार इसके पूर्व मुख्य यजमान रामपूजन राव, सीमा सिंह, कन्हैया प्रसाद राव, प्रमोद गुप्ता, राणा प्रताप सिंह, दुर्गेश तिवारी, अमन राय, विकास सिंह, पिंटू वर्मा, सतीश राव, नितेश सिंह, विजय राव आदि ने व्यास पीठ का पूजन-अर्चन कर कथा का शुभारंभ किया।