दोनों युवतियों की दोस्ती कब प्यार में बदल गई, किसी को भनक तक नहीं हुई और दोनों एक दूसरे के साथ जीने मरने की कसमें खाली। सूत्रों की माने तो 30 दिसंबर को आर्केस्ट्रा संचालक और उसके कुछ साथी मझौली राज के दीर्घेश्वर नाथ मंदिर पहुंचे और दोनों युवतियों का शादी करने की बात कहीं, लेकिन मंदिर के महंत जगरनाथ महराज ने उच्च अधिकारियों की अनुमति न होने का हवाला देते हुए वहां से लौटा दिया। उसके बाद मायूस होकर सभी लोग वापस लौट गए और भाटपाररानी तहसील जाकर दोनों ने शादी के लिए स्टांप पेपर खरीदा।
उसके बाद शादी करने के लिए सोमवार की सुबह आर्केस्ट्रा संचालक के साथ दोनों युवतियां मझौली राज के भगड़ा भवानी मंदिर पहुंचीं, जहां मां दुर्गा को साक्षी मानते हुए एक दूसरे को शादी के बंधन में बंध गए। यह देख वहां मौजूद लोगों ने चर्चाएं शुरू कर दी।
शादी के बाद युवतियां ने बताया कि एक साथ रहते रहते हम दोनों को प्यार हो गया और हम दोनों पति पत्नी के रूप में रहने का इरादा बना लिया। बहुत सारी समस्याएं सामने आईं, लेकिन हम दोनों ने अपने किए वादे पर अड़े रहे और आज हम दोनों एक दूसरे के साथ शादी कर लिया।