गौरी बाजार। कस्बे की चीनी मिल को ब्रिटिश हुकूमत ने वर्ष 1914 में स्थापित की थी। ढाई दशक से बंद पड़ी गौरी बाजार चीनी मिल परिसर का कुल क्षेत्रफल 60.78 एकड़ है।
आजादी के बाद केंद्र सरकार के कपड़ा मंत्रालय के अधीन संचालित चीनी मिल 27 साल बाद 1998 में बंद हो गई। बंदी के बाद चीनी मिल कई बार बिकी। कुछ खरीदार इसका स्क्रैप भी उठा ले गए।
किसानों एवं श्रमिकों ने कई बार आंदोलन भी किया। देवरिया से दिल्ली तक आवाज बुलंद हुई। आंदोलन के दौरान लगभग आधा दर्जन श्रमिक दुर्घटना के शिकार हो भी हुए। समय बीतने के साथ वीरान पड़ी चीनी मिल में दर्जनों बार चोरियां भी हुईं। वहीं लोगों ने मिल के आसपास की जमीन पर जगह-जगह कब्जा भी कर लिया। अब केंद्र व राज्य सरकार ने सार्वजनिक संपत्तियों को लेकर देश व प्रदेश में अभियान चला रखा है।
इसी क्रम में विशेष सचिव उत्तर प्रदेश सरकार को भेजते हुए केंद्रीय सार्वजनिक निगम भूमि एवं उपक्रम की परिसंपत्तियों को सुरक्षित करते हुए अतिक्रमण हटाने को कहा है।