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एडी बेसिक रही महिला अधिकारी तक फर्जी शिक्षक की रही सीधे पहुंच

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फर्जी शिक्षक भर्ती मामला
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एडी बेसिक रही महिला अधिकारी तक फर्जी शिक्षक की सीधी पहुंच
तत्कालीन बीएसए और चर्चित महिला अधिकारी ने मिलीभगत कर नौकरियों में की बंदरबांट
दोनों अधिकारियों के साथ ही खुद भी लेन-देन कर करोड़ों रुपये कमाने की होती है चर्चा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। अनुदानित स्कूलों में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर जिले में ही सैकड़ों शिक्षक नौकरी कर रहे हैं। गोरखपुर से भटनी के पुरनाछापर निवासी जिस शिक्षक को एसटीएफ ने अपनी हिरासत में लिया है। उसने अपने संपर्कों का इस्तेमाल करके जिले के अलावा मंडल के अन्य जनपदों के भी अपात्र लोगों को नौकरी दिलाने में सफल रहा। मंडल की एक चर्चित एडी बेसिक रही महिला अधिकारी तक उसकी सीधी पहुंच रही। जिले के तत्कालीन बीएसए और उस एडी बेसिक के साथ मिलकर उसने नियुक्तियाें में जमकर धांधली की।
चर्चा तो यहां तक है कि फर्जी शिक्षक ने उस दौरान खुद भी करोड़ों कमाएं और अनुदानित स्कूलों में नौकरी देने के एवज में इन दोनों अधिकारियों को भी मालामाल कर दिया। बीते 17 फरवरी को जैसे ही एसटीएफ की पकड़ में पुरनाछापर निवासी एवं लघु माध्यमिक विद्यालय शाहपुर पुरैनी, पथरदेवा में तैनात शिक्षक सतीश चंद्र मिश्र उर्फ राजू आया, फर्जी शिक्षक भर्ती प्रकरण में नए-नए राज खुलते जा रहे हैं। बेसिक में आठ साल पूर्व रही मंडल स्तर की एक प्रमुख महिला अधिकारी तक पहुंच का फायदा भी उसे हर वक्त मिला। जिले के तत्कालीन बीएसए ने भी फर्जी नियुक्तियों में उसका जमकर साथ दिया। एक बार जब किसी की शिकायत पर इस शिक्षक के वेतन पर रोक लगा दी गई तो तत्कालीन बीएसए ने ही नियमों को ताक पर रखकर उसके वेतन की बहाली कर दी। यह भी कहा जा रहा कि लगातार आठ साल तक रहे तत्कालीन बीएसए ने शासन तक अपनी पहुंच का लाभ उठाकर इस फर्जी शिक्षक और महिला एडी बेसिक की मदद से चहेतों को अनुदानित स्कूलों में नौकरियां बांटीं। इन सभी को उस दौरान शासन में रहे उच्चाधिकारियों का भी खूब सहयोग मिला।
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पैसे देकर भी नौकरी नहीं पाने वाले अब हैं खुश
जिले के अनुदानित स्कूलों में नौकरी पाने की आस में सैकड़ों ऐसे अभ्यर्थी है जो निर्धारित योग्यता होने के बावजूद शिक्षक पद पर नौकरी नहीं पा सके। वहीं, अयोग्य व फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे एवं मैनेजमेंट व भ्रष्ट अधिकारियों की कृपा पर नौकरी कर रहे लोग भयमुक्त होकर हर माह मोटी तनख्वाह ले रहे हैं। सतीश चंद्र के पकड़ में आने के बाद पैसे देकर फंसे लोग अब खुश हैं। वह कहते भी हैं कि भले ही उन्होंने पैसा गंवा दिया, लेकिन मास्टरमाइंड के पकड़े जाने के बाद अब अन्य बेरोजगारों को ऐसे जालसाज नहीं ठग पाएंगे।
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कोट
पुरनाछापर निवासी फर्जी शिक्षक ने कई और अनुदानित स्कूलों के नाम बताए हैं, जहां उसने अपने संपर्कों के बल पर कूटरचित शैक्षिक अभिलेखों के आधार पर अन्य लोगों को भी नौकरियां दिलाने की बात स्वीकारी है। उससे और राज उगलवाए जा रहे हैं। पुख्ता प्रमाण इकट्ठा होने के बाद से इन शिक्षकों के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए संबंधित लोगों को सूचना दी जाएगी।
-सत्यप्रकाश सिंह, एसटीएफ इंस्पेक्टर गोरखपुर।
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