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मरीजों के भोजन के बिल में गड़बड़ी की आशंका, जांच शुरू

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मरीजों के भोजन के बिल में गड़बड़ी की आशंका, जांच शुरू
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अस्पताल में भर्ती हुईं कम प्रसूताएं, कागजों में अधिक भोजन देना दर्शाया गया
भुगतान के लिए बिल सामने आने पर सीएमओ को हुआ संदेह, एसीएमओ कर रहे जांच
महिला अस्पताल और जिला अस्पताल और सीएचसी, पीएचसी में दिया गया है भोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। लॉकडाउन के दौरान जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में मरीजों को भोजन देने के बिल के भुगतान में गड़बड़ी की आशंका पर सीएमओ ने जांच का आदेश दिया है। प्रकरण की एसीएमओ ने जांच शुरू कर दी है। सीएचसी, पीएचसी में स्वयं सहायता समूह के जरिए भोजन बनवाया गया है।
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जिला महिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी पर प्रसव के बाद रहने वाली महिलाओं को भोजन मिलता है। जिला अस्पताल में भी भर्ती मरीजों को भोजन दिया जाता है। जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में इसके लिए टेंडर है, जबकि सीएचसी, पीएचसी पर स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को भोजन बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। सीएचसी के चिकित्साधीक्षक की रिपोर्ट पर भोजन के बिलों का भुगतान सीएमओ कार्यालय से होता है। लॉकडाउन में प्रसव का दर सरकारी अस्पतालों में घटा है और जिला अस्पताल में कम लोग भर्ती हुए हैं। जिला और महिला अस्पताल के ठेकेदार की ओर से भुगतान के लिए दिए गए बिल में प्रसूताओं और भर्ती मरीजों की संख्या अधिक दर्शायी गई है। सीएचसी, पीएचसी से भी भुगतान के लिए दी गई रिपोर्ट सवालों के घेरे में है। सूत्र बताते हैं कि सीएमओ कार्यालय का एक बाबू गुपचुुप तरीके से बिल पर सीएमओ का हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया। सीएमओ ने ऐसा नहीं करते हुए मामले की जांच का आदेश दे दिया। जांच कर रहे एसीएमओ डॉ. बीपी सिंह ने बताया कि अब तक की जांच में सिर्फ भागलपुर ब्लॉक के सीएचसी, पीएचसी पर भोजन नहीं बना है। अन्य सीएचसी, पीएचसी की जांच बाकी है। सर्वाधिक बिल बनकटा और भटनी सीएचसी की ओर से प्रस्तुत किया गया है। सीएमओ डॉ. आलोक पांडेय ने बताया कि भोजन के भुुगतान के लिए बिल आया था। संदेह होने पर इसकी जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद भुुगतान किया जाएगा।
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