देवरिया। कोहरे से दिन भर लोग परेशान रहे। सुबह 10 बजे तक कोहरा छाया रहा। 10 फीट आगे का रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था। वाहनों को दिन में भी लाइट जलाकर दूरी तय करनी पड़ी।रविवार की छुट्टी के कारण सड़कें सूनी रहीं। दोपहर बाद थोड़ी चहल-पहल हुई। लोगों ने घरों से निकलकर मकर संक्रांति के लिए खरीदारी की। शाम ढलते ही फिर चहल-पहल कम हो गई। ठंड से हर कोई परेशान है। पारा लुढ़क गया है। तीन दिनों से लगातार न्यूनतम छह डिग्री तापमान है। एक दिन हल्की धूप खिलने के बाद दूसरे दिन फिर भीषण ठंड पड़ जाती है। रविवार को भी ऐसा ही हुआ। शनिवार को खिली हल्की धूप ने रविवार को शहर को कोहरे के आगोश में ले लिया।
शनिवार की शाम सात बजे के बाद ही शुरू कोहरे ने देर रात उग्र रूप धारण कर लिया। सुबह जब लोगों की नींद टूटी तो देखा कि जैसे हल्की बारिश हुई है। ऐसे में लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। चाय-नाश्ता कर फिर रजाई में दुबक गए। दिन ने भी साथ दिया। रविवार को अवकाश के कारण लोगों ने घरों में परिवार के सदस्यों के साथ मौज-मस्ती की। हवाएं पांच किलोमीटर की रफ्तार से चल रहीं थीं तो नमी 65 प्रतिशत रही। पिछले करीब 20 दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड ने सभी को बेहाल कर रखा है। खासकर झोपड़ पट्टियों में रहने वाले खास परेशान हैं। ठंड से बचाव के लिए प्रशासन की ओर से किए गए बचाव के इंतजाम भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।
सेहत पर असर डालता है कोहरा
चिकित्सकों की मानें तो कोहरा सेहत के लिए भी हानिकारक है। कोहरे में मौजूद प्रदूषण और हानिकारक केमिकल का बुरा असर स्वास्थ्य पर पड़ता है और स्वास्थ्य समस्याएं होने लगती हैं। बीमारी से पीड़ित लोगों की समस्या बढ़ जाती है। यह मौसम बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र वालों के लिए खासा परेशानी वाला होता है। सर्दियों में फ्लू, सांस की परेशानी, कानों में संक्रमण और पेट की समस्याएं खासतौर से तंग करने लगती हैं। गर्भवतियां, बुजुर्ग और कमजोर इम्युनिटी वालों के लिए परेशानी ज्यादा बड़ी होती है। यह मौसम डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए भी मुश्किल भरा होता है। सर्दियों में होने वाला कोहरा भी नुकसानदेह होता है।
फसलों को भी नुकसान
कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो शीत लहर से सभी फसलों को थोड़ा या ज्यादा नुकसान होता है। टमाटर, आलू, मिर्च, बैंगन आदि सब्जियों, पपीता एवं केले के पौधों में सबसे ज्यादा 80 से 90 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। गेहूं तथा जौ में 10 से 20 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। पाले के प्रभाव से पौधों की पत्तियां एवं फूल झुलसे हुए दिखाई देते हैं। बाद में झड़ जाते हैं। यहां तक कि अधपके फल सिकुड़ जाते हैं। उनमें झुर्रियां पड़ जाती हैं एवं कलियां गिर जाती हैं। ऐसे में किसानों को फसल बचाने के लिए वैज्ञानिक तरीका अपनाना होगा।
कोहरे के कारण घंटों विलंब से चल रही ट्रेनें
देवरिया।
कोहरे की कहर से ट्रेनों की रफ्तार धीमी पड़ गई है। छपरा-देवरिया और वाराणसी-देवरिया रूट पर चलने वाली ट्रेनें घंटों विलंब से स्टेशन पर पहुंच रही हैं। यात्रियों को सर्द हवाओं के बीच रेलवे स्टेशन पर रात गुजारनी पड़ रही है।
देवरिया सदर रेलवे स्टेशन पर डाउन मथुरा-छपरा एक्सप्रेस 12, लखनऊ-बरौनी सात, गरीब रथ नौ, ग्वालियर मेल नौ, जनसधारण 10, कृषक एक्सप्रेस पांच, अवध असाम 15, आम्रपाली एक्सप्रेस 14, वैशाली एक्सप्रेस सात घंटे विलंब से चल रही है। इसके अलावा तीन दर्जन से अधिक ट्रेनें घंटों विलंब से चल रही हैं। स्टेशन पर मौजूद मठिया खुर्द गांव निवासी बृजेश यादव ने बताया कि न्यू जलपाई गुड़ी जाने के लिए ट्रेन का इंतजार सुबह पांच बजे से कर रहा हूं। 12 घंटे ट्रेन विलंब है। प्रतीक्षालय या स्टेशन पर यात्रियों के लिए सर्द मौसम के हिसाब से कोई इंतजाम नहीं किया गया है। उमानगर निवासी एसएस पांडेय गोरखपुर जाने के लिए दो घंटे से स्टेशन पर ट्रेन के इंतजार में बैठे रहे। आसनसोल जाने के लिए गौरी बुजुर्ग गांव निवासी उमेश यादव शनिवार की शाम को स्टेशन पर पहुंचे। लेकिन ट्रेन विलंब होने के कारण पूरी रात स्टेशन पर गुजारनी पड़ी। रविवार को सात घंटे विलंब थी। न्यू जलपाईगुड़ी जाने के लिए शैलेष कुमार भी आठ घंटे से स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। यात्रियों का आरोप है कि ठंड से यात्रियों के बचाव के लिए स्टेशन पर रेल प्रशासन को अलाव का इंतजाम और प्रतीक्षालय खुलवाना चाहिए। स्टेेशन या विश्रामालय पर सर्द हवाओं के बीच रात गुजारने में दिक्कत हो रही है। स्टेशन अधीक्षक परशुराम त्रिपाठी ने बताया कि कोहरे के कारण ट्रेनें विलंब से चल रहीं हैं। जरूरत के हिसाब से प्रतीक्षालय खुलवाया जाता है।