सलेमपुर। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं गृह मंत्रालय भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में बृहस्पतिवार को तहसील प्रशासन की ओर से हरैया लाला वार्ड स्थित एक निजी विद्यालय परिसर में राज्य स्तरीय बाढ़ आपदा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया।
मॉक ड्रिल में बाढ़ के कारण भवन ध्वस्त होने की स्थिति का प्रदर्शन कर राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों को परखा गया। बचाव दलों ने भवन के विभिन्न हिस्सों में फंसे मजदूरों और अन्य लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान चलाया। रेस्क्यू टीम ने कुल 28 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालकर राहत शिविर तक पहुंचाया।
मॉक ड्रिल के तहत यह काल्पनिक स्थिति बनाई गई कि लगातार बारिश और बाढ़ के पानी के दबाव के चलते निर्माणाधीन विद्यालय भवन का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर ध्वस्त हो गया है। इसमें बड़ी संख्या में मजदूर फंसे हैं। हादसे की सूचना मिलते ही एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने संबंधित विभागों को तत्काल अलर्ट किया।
इसके बाद राजस्व, चिकित्सा, अग्निशमन तथा अन्य विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत और बचाव अभियान शुरू किया। इस दौरान आपदा की स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और राहत-बचाव कार्यों की प्रभावशीलता को प्रदर्शित किया गया।
एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने कहा कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपदा के समय होने वाली चुनौतियों के प्रति लोगों और विभागों को जागरूक करना तथा राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना है। कार्यक्रम में तहसीलदार अलका सिंह, नायब तहसीलदार गोपाल जी, नायब तहसीलदार भटनी हरि प्रसाद, कोतवाल दिनेश कुमार मिश्र, विद्यालय प्रबंधक संदीप कुमार श्रीवास्तव, अग्निशमन विभाग के क्षेत्राधिकारी अरुण कुमार सहित चिकित्सा, राजस्व एवं अग्निशमन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। बरहज संवाद के अनुसार सरयू तट स्थित जयनगर में बृहस्पतिवार को अधिकारियों के नेतृत्व में एनडीआरएफ और पीएससी की संयुक्त टीम ने बाढ़ आने पर बचाव का अभ्यास किया। टीम को देख नदी तट पर वार्ड के लोगों की अच्छी-खासी भीड़ एकत्रित हो गई थी। हालांकि बारिश होने से भदिला प्रथम में आयोजित कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा।
पीएसी-एनडीआरएफ के एसआई धर्मेंद्र सिंह के नेतृत्व में 15 सदस्यीय टीम जयनगर पहुंची। जहां टीम ने बाढ़ के पानी से गांव के घिर जाने और घरों में नदी का पानी घुस जाने पर बचाव कार्य के बारे में जानकारी दिया। जबकि इसका पूर्वाभ्यास कराया। तटवर्ती गांव के लोगों से बाढ़ के समय टॉर्च, रस्सी, लाठी आदि सामानों से लैस रहते हुए आपदा से निपटने के गुर बताया।