लाल निशान से 60 सेमी ऊपर पहुंचकर गुर्राई गोर्रा
पिड़रा पुल पर कटान जारी, सड़क पर दबाव बना रही नदी, बारिश से बंधों पर आवागमन प्रभावित
जलस्तर बढ़ने से सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर/एकौना। अक्तूबर में नदियों के जलस्तर में अचानक उफान से दोआबा और कछार के 116 गांवों में बाढ़ का संकट गहराने लगा है। बृहस्पतिवार को भी राप्ती और गोर्रा नदी के जलस्तर में बढ़ोत्तरी जारी रही। गोर्रा नदी लाल निशान से 60 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच कर गुर्रा रही है। वहीं, राप्ती का जलस्तर भी खतरे के निशान के ऊपर चला गया है।
पिड़रा पुल का एप्रोच और सड़क कटने से बाधित रास्ते के बहाल होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। बदले मार्ग से नदी का जलस्तर बढ़ने से आवागमन दूभर हो गया है। बारिश से बंधे सलसला गए हैं। इस कारण बड़ी गाड़ियां जोखिम उठाकर जा रहीं हैं। पिड़रा पुल पर हो रही कटान रुकने का नाम नहीं ले रही है।
यहां पीडब्ल्यूडी रास्ता चालू करने में कामयाब नहीं हो पा रहा है। कटान स्थल पर जलस्तर बढ़ने से बचाव कार्य में बाधा आ रही है। कटान रोकने के लिए पेड़ की टहनियों का सहारा लिया जा रहा है। राप्ती और गोर्रा नदी का जलस्तर बढ़ने से इनकी सहायक नदियां कुरना, बथुआ और मझने नाला में भी बाढ़ आ गई है। इन नदियों के पानी से किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई है।
राप्ती नदी भेड़ी स्थित कटान स्थल पर दबाव बना रही है। यहां बोल्डर पिचिंग धंसने लगा है। दोआबा के 52 गांवों के लोगों को बाढ़ की चिंता सता रही है। ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि रामसुधारे पासवान ने कहा कि सूखा के कारण पानी चलाकर किसी तरह किसान धान की फसल को बचाए थे। मक्का और तिलहन की फसल भी ठीक थी। लेकिन जलस्तर बढ़ने से नदी के किनारे की सैकड़ों एकड़ तैयार फसल डूब गई है।
इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता नरेंद्र जाड़िया ने कहा कि बाढ़ खंड बंधों की सुरक्षा को लेकर चैतन्य है। बांध पर कोई खतरा नहीं है। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन आरके सिंह ने कहा कि पिड़रा पुल पर बचाव कार्य चल रहा है। जलस्तर बढ़ने से दिक्कत आ रही है।
1998 की बाढ़ विभीषिका दोहराने को मचल रही सरयू
सड़क के किनारे टेंट में रूखा-सूखा खाकर घर लौटने का इंतजार कर रहे कोलखास के बाढ़ पीड़ित
बरहज। सरयू नदी में उमड़ रहे सैलाब के सामने लोग बेबस हो गए हैं। नदी 1998 की बाढ़ जैसी विभीषिका दोहराने के लिए मचल रही है। सरयू में आए उफान के कारण चारों ओर पानी ही पानी हो गया है। रामजानकी मार्ग पर उग्रसेन पुल के निकट टेंट में गोरखपुर जनपद के कोलखास विस्थापित लोग रुखा-सूखा खाकर जीवन यापन कर रहे हैं। जो बाढ़ के हटने और घर लौटने के इंतजार में हैं।
नदी में उमड़ रहे सैलाब से भदिला प्रथम टापू बना हुआ है। जबकि गोरखपुर जनपद के विस्थापित कोलखास गांव के लोगों के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। इससे लोग सड़क के किनारे टेंट डालकर जीवन-यापन कर रहे हैं। घर में पानी घुस जाने के कारण अधिकतर महिला-बच्चे नात-रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं।
टेंट में रह रहे बाढ़ पीड़ितों का गला पीड़ा सुनाते हुए रुंध जा रहा है। गांव निवासी 80 वर्षीय मुखलाल, उनकी पत्नी मिंता देवी, दिव्यांग पन्नेलाल, कक्षा छह की छात्रा करिश्मा, अशोक, राजेश आदि का कहना है कि शुरू में प्रशासन ने सुध ली थी। लेकिन दोबारा नदी के उफनाने पर आई बाढ़ में अधिकारियों की गाड़ियां आ-जा रही हैं। लेकिन टेंट के सामने रुकना कोई मुनासिब नहीं समझ रहा है। लोगों का कहना है कि नदी का जलस्तर तेजी से ऊपर की ओर बढ़ रहा है। यही हाल रहा तो 1998 की बाढ़ जैसे हालात हो जाएंगे।
इंसेट में-
रामजानकी मार्ग के ऊपर से बहने लगी सरयू
बरहज। सरयू में उमड़ रहे सैलाब के कारण नदी खतरे के निशान 66.50 से पौने दो मीटर ऊपर 68.25 मीटर पर बह रही है। बृहस्पतिवार को नदी जगह-जगह रामजानकी मार्ग के ऊपर से बहने लगी है। इससे लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई हैं। जलस्तर थमने का नाम नहीं ले रहा है।
पिछले 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 18 सेमी की बढ़त दर्ज की गई है। नदी में उमड़ रहे सैलाब से परसियां-विशुनपुर देवार के अलावा नौकाटोला, बेलडॉड, परसियां तिवारी, बिनवापुरी, कटइलवा, मठियां, कुवाईच टोला में बाढ़ का पानी घुस गया है। कपरवार मेें छठ घाट पर बना स्नान घर डूब गया है। जबकि पश्चिमटोला में पानी घुस गया है।
कटइलवा, कुरह परसियां, बेलडॉड गांव में जाने वाले मार्ग पर पानी भर गया है। जबकि राजपुर-नौकाटोला, बेलडॉड में नदी आदि जगहों पर नदी रामजानकी से करीब दो से ढाई फीट ऊपर बहने लगी है। वहीं, सरयू नदी पार परसियां-विशुनपुर देवार के दशरसरिया के निकट नदी पीडब्ल्यूडी बांध के ऊपर से होकर बह रही है। जलस्तर में तेजी से हो रहे इजाफा के कारण लोगों की नींद उचट गई है।
बाढ़ से घिरे गांवों के लोग स्वयं के साथ सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जाते देखे जा रहे हैं। बाढ़ के प्रभाव से मवेशी भी नहीं बच पा रहे हैं। उनके लिए चारे का संकट गहरा गया है। लोगों का कहना है कि पहले सूखा से अब आई बाढ़ से बची-खुची फसल बर्बाद हो रही है।
इंसेट में-
बाढ़ पीड़ित दो परिवारों को प्राथमिक विद्यालय में कराया गया शिफ्ट
बरहज। सरयू के उफनाने से चारों ओर पानी ही पानी हो गया है। नगर सहित परसियां-विशुनपुर देवार के दर्जनों मजरों के अलावा आधा दर्जन से अधिक तटवर्ती गांव बाढ़ की जद में आ गए हैं। इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों की दुश्वारियां बढ़ गईं हैं। प्रशासन ने दो परिवारों को प्राथमिक विद्यालय में शिफ्ट कराया है। तहसीलदार अश्वनी कुमार ने बताया राजस्व ग्राम कपरवार के कुवाईच टोला निवासी बाढ़ पीड़ित पार्वती देवी पत्नी रामदयाल को कन्या पाठशाला के कक्ष संख्या एक और आबिदा खातून पत्नी अमजद शाह के परिवार को कक्ष संख्या दो में शिफ्ट कराया गया है।
कोट-
सरयू में उमड़ रहे सैलाब से जलस्तर में काफी बढ़त दर्ज की गई है। बृहस्पतिवार की रात से जल के स्थिर होने और शुक्रवार की शाम से कमी आने की संभावना है। फिलहाल, आई बाढ़ से दुश्वारियां बढ़ीं हैं। स्थिति सामान्य है।
-अशोक द्विवेदी सहायक अभियंता