बेटियों की कामयाबी से बीमार बाप को ‘नवजीवन’।
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नवरंग के सृजन से तस्वीर बदल जाती है
हाैसले इरादों में तब्दील हो जाएं तो तकदीर बदल जाती है
ये लाइनें अभाव में रहकर लक्ष्य को पानेे वाली देसही देवरिया की दो बेटियों की कहानी को चरितार्थ करती हैं।
बीमारी और आशाओं से टूट चुके चंद्रभान सिंह के लिए यह होली, रंग-गुलाल और गुझियों की मिठास को दोगुना कर दिया है। और हो भी न क्यूं, दरअसल उनकी दो बेटियों का चयन सीमा सुरक्षा बल में हुआ है। प्रतिभावान बेटियों में मझली बेटी ड्राइविंग करेगी तो छोटी बेटी टेलरिंग का काम करेगी।
देसही देवरिया के जिगनी राजा निवासी चंद्रभान सिंह की चार संतान में दोनों बेटियां शुरू से ही प्रतिभावान रही हैं। गुर्देे के इलाज में सब कुछ गवां चुके चंद्रभान सिंह का बेटा अविनाश सिंह जेसीबी चलाकर परिवार का भरण पोषण कर रहा है। उनका अखिल भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान नई दिल्ली में इलाज चल रहा है। मझली बेटी प्रियंका स्नातक अंतिम वर्ष की परीक्षा दे रही है इसका चयन ड्राइविंग पद के लिए हुआ है। इसके साथ ही उसे मंडल स्तर की एथलेटिक का खिताब भी मिला चुका है।
प्रियंका ने पिछले वर्ष ही ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया। बीएसएफ से चालक की जगह निकली तो ड्राइविंग ट्रेड के लिए आवेदन कर दिया। दो चक्रो की परीक्षा में प्रियंका का चयन हो गया। छोटी बेटी विनिता इंटर की परीक्षा दे चुकी है। लिखित और शारीरिक परीक्षा पास करने के बाद दोनों बहनों के हौसले बुलंद हैं, धुन की पक्की दोनों बेटियों ने बताया कि रुपये की तंगी तो आई लेकिन मां-बाप के आर्शीवाद से इस मुकाम पर पहुंची।