फतेहपुर नरसंहार-
दूबे पक्ष ने विपक्षियों के परिवारवालों पर लगाया हत्या की धमकी देने का आरोप
दोनों पक्षों के घरों और गांव के बाहर अब भी 24 घंटे है पुलिस का पहरा
प्रेमचंद पक्ष ने कहा कि न्यायालय के आदेश पर है भरोसा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। रुद्रपुर थाना क्षेत्र के फतेहपुर में दो अक्तूबर को हुए नरसंहार के बाद पुलिस और प्रशासन की सक्रियता अब भी बनी हुई है। मामला अब न्यायालय में विचाराधीन है। दूबे पक्ष का कहना है कि करीब चार माह बीतने को हैं, लेकिन अब भी मुकदमा और संपत्ति की वरासत नहीं हो पाई है। मृतक सत्यप्रकाश दूबे की बेटी और बेटे प्रेमचंद यादव पक्ष पर अब भी हत्या की धमकी देने का आरोप लगा रहे हैं। एहतियात के तौर पर दोनों परिवाराें के घरों, गांव के बाहर और स्व. सत्यप्रकाश दूबे की पुत्री शुभिता द्विवेदी के घर पर भी 24 घंटे पुलिसकर्मियों की चौकसी बनी हुई है।
दो अक्तूबर को फतेहपुर के लेहड़ा टोले पर जमीन के विवाद में पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रेमचंद यादव की हत्या के बाद आक्रोशित भीड़ ने सत्यप्रकाश दूबे समेत उनके परिवार के पांच लोगों की हत्या कर दी। इसके बाद प्रशासन ने गांव में जमीन की पैमाइश कराई तो सामूहिक हत्याकांड के आरोपियों के मकान सरकारी जमीन पर मिले। पैमाइश पर कई संगठनों समेत सपा नेताओं ने सवाल उठाए थे। पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने फतेहपुर गांव का दौरा भी किया था।
उस मामले में बड़े स्तर पर कार्रवाई हुई। अतिक्रमण हटवाने के लिए बुलडोजर भेजा गया था, लेकिन उच्चाधिकारियों के आदेश पर वह वापस हो गया था। मृतक सत्यप्रकाश दूबे की पुत्री शुभिता द्विवेदी ने बताया कि घटना के चार माह बीतने को हैं, लेकिन अब तक मुकदमा और पैतृक संपत्ति की वरासत नहीं हो पाई है। दोनों भाई नाबालिग हैं। आरोप लगाया कि स्व. प्रेमचंद पक्ष के लोग उन्हें और दोनों भाइयों को जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। सोमवार को इस मामले की तारीख थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो पाई।
उधर, पुलिस ने 25 लोगों के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में भेज दिया है, शेष लगभग 50 के विरुद्ध विवेचना चल रही है। दोनों पक्षों के घरों पर पुलिस का पहरा बरकरार है।
नरसंहार के मामले में एक फरवरी को जमानत पर होगी सुनवाई
फतेहपुर सामूहिक हत्याकांड के आरोपियों के विरुद्ध दाखिल चार्जशीट के बाद अभियुक्तों में से एक शेषनाथ तिवारी ने अपना जमानत प्रार्थनापत्र जनपद न्यायाधीश के न्यायालय में दाखिल किया था। अपर शासकीय अधिवक्ता आशुतोष सिंह के अनुसार, सोमवार को अपर जनपद न्यायाधीश तृतीय के न्यायालय में सुनवाई हुई। उस दौरान अगली सुनवाई के लिए एक फरवरी को तारीख नियत की गई है।
25 आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में दाखिल हो चुकी है चार्जशीट
फतेहपुर नरसंहार के मामले में पुलिस ने 25 आरोपियों को गिरफ्तार कर चार्जशीट न्यायालय भेजकर संज्ञान करा दिया है। शेष लगभग 50 के विरुद्ध विवेचना चल रही है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद गांव में लोग चिंतित हैं। पुलिस की जांच में किसका नाम सामने आ जाए, यह सोचकर कई लोग घबरा रहे हैं।
अब उच्च न्यायालय के आदेश पर टिकीं हैं निगाहें
एक जनवरी को डीएम न्यायालय ने आदेश दिया था, इसके विरुद्ध उच्च न्यायालय में दाखिल हुई है। दो अक्तूबर को रुद्रपुर थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव के लेहड़ा टोले पर जमीन के विवाद में हुए नरसंहार के मामले में पीड़ित पक्ष की ओर से उच्च न्यायालय में डीएम के आदेश के विरुद्ध याचिका दाखिल की गई है। उच्च न्यायालय के ही निर्देश पर डीएम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। इसमें प्रशासन ने गांव में जमीन की पैमाइश कराई तो आरोपियाें के मकान सरकारी जमीन में मिले थे। 15 सदस्यीय राजस्व टीम ने दूसरी बार पैमाइश की थी और तहसीलदार कोर्ट में दाखिल किया था, जिस पर 11 अक्तूबर को तत्कालीन तहसीलदार ने सरकारी जमीन से बेदखली का आदेश दिया था। इसके विरुद्ध डीएम कोर्ट में तय सीमा के अंदर जमीन विवाद से संबंधित पांचों अपीलाें को डीएम ने बीते एक जनवरी को खारिज कर दिया था और तहसीलदार के आदेश को बरकरार रखा। अब सबकी नजर उच्च न्यायालय के रिट में आने वाले फैसले पर टिकी है।
घटना के बाद बिखर गए दोनों परिवार
नरसंहार के बाद दोनों परिवार बिखर गए हैं। सत्यप्रकाश दूबे का परिवार खत्म हो गया। दो बेटे देवेश और अनमोल तथा बेटी शुभिता बचे हैं। दोनों भाई बड़ी बहन के घर रह रहे हैं। उधर, पूर्व जिला पंचायत सदस्य स्व. प्रेमचंद यादव की हत्या हो गई और परिवार के बाकी सदस्य जेल में हैं। इनके परिवार में महिलाएं और बच्चे बचे हैं। दोनों परिवारों में फिर कोई विवाद न हो, इसलिए पुलिस प्रशासन की ओर से सावधानी बरतते हुए पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
अनमोल की हालत रह-रहकर हो जाती है खराब
अनमोल की बड़ी बहन शुभिता द्विवेदी ने बताया कि घटना के दिन अनमोल के सिर से गोली छूकर चली गई थी। सिर में गंभीर चोटें आई थीं। तभी से उसका इलाज चल रहा है। अनमोल का इलाज बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर से चलता है। अब भी रह-रहकर उसकी तबीयत अचानक खराब हो जाती है। सिर में बेतहाशा दर्द होने लगता है। इस वजह से सभी लोग बेचैन हो जाते हैं। रात में ही उसे लेकर गोरखपुर जाना पड़ता है।
सत्यप्रकाश दूबे की बेटी शुभिता बोलीं
जिस जमीन की वजह से पूरे परिवार की नृशंस हत्या हो गई। उसमें सुलहनामा बनवाकर पूरे कागजात छीन लिए गए। फिर भी विपक्षी उस जमीन को जोत-बो रहे हैं। उस पर अब भी विपक्षियों का कब्जा है। उसे खाली कराया जाए और विपक्षियों ने जो बैनामा कराया है, उसे निरस्त किया जाए। उन्हाेंने बताया कि घटना के चार महीने बीतने को हैं, मुकदमा और संपत्ति का अभी तक वरासत नहीं हो पाया है। दोनों भाई अनाथ हो चुके हैं, वे अब कहां जाएं। पढ़ाई और नौकरी का आश्वासन मिला था, वह भी पूरा नहीं हुआ।
प्रेमचंद यादव की पुत्री अल्का बोलीं
पूर्व जिला पंचायत सदस्य स्व. प्रेमचंद यादव की पुत्री अल्का यादव ने कहा कि पूरा मामला न्यायालय में विचाराधीन है। हमें न्यायालय पर पूरा भरोसा है। जो निर्णय आएगा, वह हमें मान्य होगा।