संवाद न्यूज एजेंसी
लार। वन विभाग की ओर से दोगारी बांध के किनारे पौधरोपण के लिए लगाए जा रहे पिलर व तार को किसानों ने अपनी भूमि होने का हवाला देकर रविवार को रोक दिया। इसके बाद नाराज किसानों ने बंधे पर प्रदर्शन भी किया।
जानकारी पर पहुंचे वन क्षेत्राधिकारी ने लोगों को शांत कराया। किसानों ने कहा कि बिना मुआवजा मिले किसी भी हाल में कार्य नहीं होने देंगे। दोगारी, राजमल, पटनेजी गांव के किसानों के मुताबिक तकरीबन पचास वर्ष पहले दोगारी राजमल बंधे का निर्माण हुआ था।
जिसमें किसानों की भूमि समाहित है। बदले में आज तक किसी भी किसान को मुआवजा नहीं मिला है। इधर वन विभाग वर्तमान बांध की चौड़ाई से बीस कड़ी अधिक दोनों तरफ किसानों की भूमि में पिलर लगा पौधरोपण के लिए जगह बनाना चाह रहा है। जानकारी पर पहुंचे किसानों ने कार्य को रोक दिया।
यह देख वन दरोगा अनिल सिंह ने कार्य रुकने की सूचना वन क्षेत्राधिकारी सलेमपुर को दी। मौके पर पहुंच प्रदर्शन कर रहे किसानों को शांत कराया। उन्होंने कहा कि बाढ़ खण्ड के द्वारा पिलर लगाने की अनुमति मिली है। इस पर किसानों ने कहा कि इससे संबंधित लिखित आदेश दिखाइए। आरोप है वह नहीं दिखा सके। किसानों के तेवर देख बाढ़ खंड के अभियंता से फोन पर बात किया। इस दौरान अभियंता ने कहा कि मेरे तरफ से कोई अनुमति नहीं दी गई है। वनक्षेत्राधिकारी गौतम कुमार मौर्य ने बताया कि किसानों द्वारा लगाया जा रहा आरोप बेबुनियाद है। बीस मीटर में पिलर लगाने का कार्य कर रहे हैं।