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मुआवजे से नहीं बनेगी बात, रद्द हो परियोजना

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प्रदर्शन करते किसान। - फोटो : amar ujala
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भटनी। हथुआ-भटनी रेल परियोजना के विरोध में प्रभावित गांव रायबारी के चखनी घाट पर रविवार को भूमि बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों की पंचायत हुई। पंचायत में सैकड़ों किसानों ने एक स्वर से किसी भी कीमत पर रेल परियोजना के लिए जमीन देने से इंकार कर दिया।
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हथुआ-भटनी 79.74 किलोमीटर की नई रेल लाइन परियोजना को वर्ष 2005 में स्वीकृति मिली। इसके लिए जिले के सलेमपुर तहसील के तीन और भाटपाररानी तहसील के 11 गांवों की 41.902 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित कर ली गई। किसानों के विरोध की वजह से यह रेल परियोजना अधर में है। शासन की सख्ती के बाद विवाद को सुलझाने का प्रयास शुरू हुआ है। इसके लिए गुरुवार को सदर तहसीलदार ओमप्रकाश और रेलवे के इंजीनियर विपुल माथुर ने रेलवे गेस्ट हाउस में किसानों से वार्ता की। किसानों के दबाव को देखते हुए अफसरों ने वर्तमान सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा देने की सहमति जताते हुए अंतिम निर्णय डीएम को देने की बात कही। इस पर अधिकांश किसान अफसरों के सामने ही प्रदर्शन करने लगे और बैठक का बहिष्कार कर घर लौट गए। वहीं, किसानों का एक तबका वर्तमान सर्किल रेट के चार गुना मुआवजा और अंडर ग्राउंड समपार ढाला मिलने पर अपनी जमीन देने को तैयार हुआ है। अधिकारियों ने उन किसानों से शपथ पत्र के साथ दो दिनों में कार्यालय में उपस्थित होने को कहा है। इस बीच रविवार को बड़ी संख्या में किसान रायबारी के चखनी घाट पर डॉ. रामजी द्विवेदी के नेतृत्व में पंचायत की। एक स्वर से रेल परियोजना के लिए जमीन देने से इंकार कर दिया। बैठक में दीनदयाल यादव, सुरेश सिंह, हंसनाथ यादव, रामाश्रय सिंह, छट्ठू यादव, बुद्धिराम, मोतीलाल, मनोज कुमार, देवनंदन, हीरालाल सिंह आदि मौजूद रहे। 
 
किसान विरोधी है रेल परियोजना 
भटनी-हथुआ परियोजना का प्रभावित गांवों के किसान वर्ष 2008 से विरोध कर रहे हैं। किसान संघर्ष समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. रामजी द्विवेदी और उपाध्यक्ष त्रिवेणी यादव का कहना है कि यह रेल परियोजना किसान विरोधी है। पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ससुराल और रिश्तेदारों को रेल लाइन से जोड़ने के लिए अपने कार्यकाल में इस परियोजना को स्वीकृत किया। किसान अंत तक इस परियोजना का विरोध करेंगे।
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