देवरिया। जिले में सरकारी क्रय केंद्रों पर धान की खरीद नहीं हो रही है। अभी तक केवल 2500 मीट्रिक टन ही खरीद हो पाई है, जबकि लक्ष्य 83 हजार मीट्रिक टन का है।
किसानों का कहना है कि पिछले सप्ताह तक नमी का बहाना था, अब किसी को सत्यापन के अभाव में लौटाया जा रहा है, तो किसी को बताया जा रहा है कि अभी राइस मिलों से एग्रीमेंट नहीं हो पाया है। परेशान किसान अब अपना धान आसपास के छोटे राइस मिलरों और धंधेबाजों को बेच रहे हैं।
जिले में पिछले साल 115 क्रय केंद्रों पर 19284 किसानों ने धान बेचा था। इसके बाद इस साल जिले में 99 क्रय केंद्र ही बनाए गए हैं। इसमें से प्रदेश सरकार के 98 क्रय केंद्र हैं, जिनमें खाद्य विभाग के 28, पीसीएफ के 37, पीसीयू के 30, मंडी परिषद के 2 और एफपीओ का एक केंद्र है।
वहीं एक केंद्र भारतीय खाद्य निगम का है, लेकिन इन क्रय केंद्रों पर खरीद की रफ्तार बहुत धीमी है। अब तक लगभग 2500 मीट्रिक टन धान की खरीद ही हो पाई है। खाद्य विभाग ने 1374 मीट्रिक टन, पीसीएफ ने 451 मीट्रिक टन, पीसीयू ने 568 मीट्रिक टन, मंडी परिषद ने 32 मीट्रिक टन धान की खरीद की है। वहीं, केंद्रीय पूल में एफसीआई ने भी लगभग 53 मीट्रिक टन धान की खरीद की है।
किसानों का कहना है कि 15 नवंबर के बाद से ही लोग अपना धान बेचने के लिए केंद्रों का चक्कर लगा रहे हैं।
पहले किसानों को यह कहा जा रहा था कि अक्तूबर के अंत में हुई बारिश के चलते धान में नमी 20 प्रतिशत से अधिक है, जबकि सरकारी मानक 17 प्रतिशत से कम नमी का है। इस वजह से नवंबर के दूसरे सप्ताह में भी रफ्तार सुस्त थी। अब दिसंबर शुरू होने पर भी रफ्तार नहीं बढ़ रही है।
अब खाद्य सुरक्षा विभाग के अफसर रफ्तार सुस्त होने के पीछे किसानों का सत्यापन नहीं होने का हवाला दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिले में अब तक 3698 किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीकरण कराया है।
इसमें से लगभग 1200 किसानों का सत्यापन लंबित है। क्रय केंद्रों पर धान की खरीद नहीं होने के चलते किसानों को मजबूरी में अपना धान आसपास के दुकानदारों को 1850 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचना पड़ रहा है, जबकि सरकारी दर 2369 से 2389 रुपये तक है।
राइस मिल भी बने बाधक : सरकारी क्रय केंद्र पर जो धान खरीदा जाता है, उसे राइस मिल संचालक ले जाते हैं और कुटाई के बाद चावल वापस करते हैं।
इसके लिए राइस मिल मालिकों और खाद्य विपणन विभाग में अनुबंध होता है, लेकिन इस साल मामला अब भी पेंडिंग में है।
बताया जा रहा है कि तीन नवंबर को लखनऊ में राइस मिल मालिकों की प्रदेश स्तरीय बैठक हुई थी। राइस मिलर्स वेलफेयर एसोसिएशन की यह बैठक प्रदेश अध्यक्ष यूसी मिश्रा की अगुवाई में हुई थी। इसमें यह निर्णय लिया गया था कि पांच दिसंबर तक कोई भी मिलर किसी सेंटर से धान का उठान नहीं करेगा। इसलिए अब तक किसी भी मिलर ने क्रय केंद्र से धान का उठान ही नहीं किया है।