पोखरा खुदवाया किसान ने, भुगतान लिया प्रधान ने
रामपुर कारखाना ब्लॉक के डीहा बसंत में उजागर हुआ फर्जीवाड़ा
मछली पालन के लिए किसान ने जेसीबी से खुदवाया था पोखरा
ग्राम प्रधान ने मनरेगा योजना से करा लिया 81 हजार का भुगतान
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। देश कोरोना महामारी से जंग लड़ने में जुटा है तो वहीं मनरेगा में छाई जिम्मेदारों की बदनियती ऐसे अवसर में भी खूब फल-फूल रही है। बनकटा ब्लॉक में लाखों रुपये का फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद विभिन्न ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजना के तहत किए गए भ्रष्टाचार की कलई खुलने लगी है। ताजा मामला रामपुर कारखाना ब्लॉक की डीहाबसंत ग्राम पंचायत का है।
यहां के किसान विजय प्रताप सिंह ने दिसंबर माह में अपनी निजी जमीन में जेसीबी के सहारे पोखरा खुदवाया। करीब छह कट्ठे में तैयार इस पोखरे पर ग्राम प्रधान की नजर लग गई। उन्होंने सेक्रेट्री, तकनीकी सहायक की मिलीभगत से पोखरे का 81 हजार 536 रुपये का एस्टीमेट तैयार कर लॉकडाउन के दौरान भुगतान करा लिया। जिन श्रमिकों के खाते में मजदूरी भेजी गई उनके जगह दूसरे मजदूरों का फोटो विभागीय पोर्टल पर अपलोड किया गया है। विजय प्रताप सिंह दीर्घ किसान की श्रेणी में आते हैं। जबकि निजी जमीन में मनरेगा से पोखरा खुदाई की योजना लघु एवं सीमांत किसानों के लिए हैं। उनके पास दो हेक्टेयर से अधिक जमीन होने के बावजूद लघु किसान दर्शाकर भुगतान प्राप्त किया गया है। ग्राम प्रधान रामनाथ का कहना है कि विजय प्रताप सिंह के पोखरे की खुदाई मनरेगा योजना के तहत मजदूरों से कराई गई है। राजनैतिक विवाद के चलते कुछ लोग उन्हें भ्रमित कर रहे हैं।
वर्जन
डीहा बसंत ग्राम पंचायत से पोखरे की खुदाई में अनियमितता संबंधी शिकायत अभी मेरे पास नहीं आई है। ऑफिस पहुंचने पर फाइल मंगवाकर देखूंगा किसी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- महेश नरायण पांडेय, पीडी, प्रभारी बीडीओ।