- नौकरी के सिलसिले में कुछ लोग रहते हैं बाहर, गांव आने पर सबका एक चूल्हे पर बनता है भोजन
- परिवार के सबसे बुजुर्ग रिटायर शिक्षक गया चंद हैं परिवार के मुखिया
रुद्रपुर (देवरिया)। जिले के लबकनी गांव का चंद परिवार करीब 100 साल से एक साथ है। संयुक्त परिवार की मिसाल इस परिवार में अब 39 सदस्य हैं, जो परिवार की छठीं पीढ़ी तक विस्तारित है। परिवार के कई सदस्य नौकरी और रोजगार के सिलसिले में बड़े शहरों में भी हैं, लेकिन गांव आने पर सभी एक ही मकान में रहते हैं और सबका भोजन भी एक ही रसोई घर में बनता है।
परिवार के सबसे बुजुर्ग सेवानिवृत शिक्षक गया चंद के अनुसार करीब 100 साल पहले उनके पूर्वज जगदेव चंद गोरखपुर जिले के बांसगांव तहसील के सहदोडाढ़ गांव से देवरिया जिले के लबकनी गांव में आकर बस गए थे। जगदेव के पुत्र राम गरीब चंद के दो पुत्रों से बढ़ता हुआ कुनबा आज तक साथ-साथ है। परिवार में कुल 39 सदस्य हो गए हैं। राम गरीब चंद के पुत्र सुभाष चंद और लक्ष्मी चंद थे। सुभाष चंद के दो पुत्र स्व. हरिप्रसाद चंद और दूसरे गया चंद हैं। वहीं लक्ष्मी चंद के पुत्र गुलाब चंद थे। स्व. हरि प्रसाद चंद के पांच पुत्रों में अभय प्रताप चंद्र और सत्य प्रकाश चंद सेवानिवृत शिक्षक हैं।
उन्होंनेे बताया कि प्रभु दयाल चंद होमगार्ड विभाग में वरिष्ठ लिपिक हैं। आशुतोष प्रताप चंद्र जिला खांडसारी अधिकारी और रासबिहारी चंद दुग्ध अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। गया चांद के पुत्र राम प्रताप चंद कृषि तकनीकी सेवा में कार्यरत हैं। स्वर्गीय गुलाबचंद के पुत्र निर्भय प्रताप चंद सहायक निदेशक उद्यान केंद्रीय लोक निर्माण विभाग से अवकाश प्राप्त कर चुके हैं। उनके दूसरे पुत्र जयप्रकाश चंद मनोरंजन एवं वाणिज्य कर अधिकारी के पद से सेवानिवृत हो चुके हैं। कुंवर बहादुर चंद होमगार्ड विभाग में कार्यरत हैं और जय शिव प्रताप चंद भी शिक्षक हैं।
इन सब लोगों के परिवार में 18 बच्चे हैं। संयुक्त परिवार के कई बच्चे दिल्ली विश्वविद्यालय एवं देश के उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार के मुखिया गया चांद ने बताया कि शादी विवाह या त्योहार पर पूरा परिवार एक साथ जुटता है। संयुक्त परिवार में जो सुख है वह कहीं नहीं मिलता है।
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सोशल मीडिया में मिटाई है दूरी
पारिवारिक विघटन में मोबाइल की भूमिका विषय पर इस संयुक्त परिवार के सदस्य और बेसिक शिक्षक शिव प्रताप चंद कहते हैं कि तकनीकी के दुरुपयोग से दिक्कत आती है, सदुपयोग से समस्याएं मिटती हैं। मोबाइल और सोशल साइट्स ने आर्थिक मजबूरी में घर से दूर गए परिवार के सदस्याें और पढ़ाई के लिए बाहर गए बच्चाें को जोड़कर रखने में मदद की है। परिवार के लोग सोशल मीडिया ग्रुप से कनेक्ट हैं। हर दिन फोन या वाट्सएप कॉल पर सभी एक दूसरे का सुख-दुख जानते रहते हैं। खुशी के छोटे-छोटे मौके पर जब परिवार के लोग तत्काल एकत्र नहीं हो सकते तो फोन के जरिए ही जुड़ जाते हैं।
बुजुर्ग गया चंद कहते हैं कि किसी भी बड़ी से बड़ी समस्या का निदान पूरा परिवार मिलजुल कर देता है। अभी 2 माह पहले गांव पर बनी नई मकान के गृह प्रवेश में पूरा परिवार एकत्र हुआ था। जब पूरा परिवार जुटता है तो घर की रौनक बढ़ जाती है।