सलेमपुर। ठाकुर गौरी गांव के रामप्यारे गुप्ता तीन साल पहले अपने गांव में नकली नमक का कारोबार शुरू किया था। घर के अंदर कच्चे नमक को टाटा के रैपर में सील कर आजमगढ़, बलिया, वाराणसी समेत कई जिलों को भेजता था। नमक की गुणवत्ता व कम वजन जान किसी उपभोक्ता ने तीन महीना पहले टाटा कंपनी को शिकायत किया था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कंपनी के टाटा कंज्यूमर प्रोजेक्ट लिमिटेड के मार्केटिंग मैनेजर रिशु मिश्रा जांच करने पहुंचे तो उसका भंडाफोड़ हुआ।
राम प्यारे गुप्ता की सोहनाग रोड में किराने की दुकान है। टाटा नमक होल सेल में उसे 17 रुपया में मिलता था। उसने अधिक धन कमाने के चक्कर में नकली टाटा नमक खुद तैयार कर कम रेट में दुकानदारों को देने का निर्णय लिया। इसके लिए वह अपने गांव ठाकुर गौरी को चुना। वह गोरखपुर से कच्चा नमक और रैपिंग मशीन खरीदकर कर लाया। घर पर ही टाटा रैपिंग वाली पालीथिन में भरकर मात्र 12 रुपया किलो ग्राहकों को देने लगा। इससे ग्राहकों पांच रुपये प्रतिकिलो जहां बचत होने लगा। माल तैयार करने में उसे केवल प्रतिशत लागत आती थी। नकली नमक कारोबार में उसे 60 फीसदी का मुनाफा आने लगा। पकड़े जाने के बाद नमक का नमूना कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर और पुलिस ने लिया है। हालांकि खाद्य निरीक्षक को इसकी जानकारी नहीं है।
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नकली नमक से होता है ये रोग
सीएचसी के अधीक्षक डॉ.अतुल कुमार ने बताया कि आयोडिन युक्त नमक नहीं खाने कई तरह के रोग होतें हैं। घेंघा रोग, वजन में कमी, कमजोरी, धकावत, गले में सूजन आदि रोग होते हैं। इसीलिए ब्रांडेड कंपनी का नमक का सेवन करना चाहिए।
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