संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। चतुर्मास के बाद देवताओं के जागरण दिवस देवउठान एकादशी पर्व पर शनिवार को नगर-क्षेत्र में श्रद्धा और आस्था का सागर उमड़ा। देवालयों में भक्तिभाव का वातावरण रहा।
सुबह से ही लोग स्नान-ध्यान कर भगवान विष्णु का पूजा-अर्चन किए। जबकि शाम को महिलाओं ने मंगलगीतों के साथ माता तुलसी-शालिग्राम विवाह अनुष्ठान किया। देवताओं के जागरण दिवस देवउठनी एकादशी पर्व पर लोगों ने व्रत रखकर घरों की सफाई करते हुए पूजा-अर्चना की।
नीलकंठ महादेव मंदिर, प्राचीन दुर्गा मंदिर, विंध्यवासिनी मंदिर, सोनावे भगवती, बाबा महेंद्रानाथ मंदिर के अलावा भलुअनी, मगहरा, करुअना, गड़ेर, सोनाड़ी, कपरवार, पैना, बरांव, देवपार क्षेत्रों के देवी-देवताओं के मंदिरों पर पूरे दिन भक्तों की भीड़ रही। जहां सभी ने पूजा-अर्चन किया। घंटों की गूंज से क्षेत्र भक्तिमय रहा। कुछ एक जगहों पर अखण्ड कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया था।
महिलाओं ने माता तुलसी के स्थान की साफ-सफाई करते हुए आम पत्र आदि से सजाकर उनका श्रृंगार किया। जबकि दीपदान करते हुए धूमधाम से भगवान शालिग्राम और माता तुलसी का वैवाहिक संस्कार संपन्न कराया। मंगलगीतों और पारंपरिक नृत्यों से वातावरण भक्तिमय हो गया था। मान्यता है कि आज के ही दिन से विवाह, उपनयन, गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्यक्रम का शुभारंभ किया जाता है। भगवान विष्णु आज ही के दिन योगनिद्रा से जागृत होते हैं।