भागलपुर। तमकुहीराज से सिकंदरपुर तक बनने वाले फोरलेन पर भागलपुर के सरयू नदी पर करीब 1185 मीटर लंबे पुल के लिए पिलर की खोदाई का कार्य शुरू हो गया है। निर्माण कार्य में तेजी आने से लोगों में खुशी का माहौल है।
निर्माण कार्य पूरा होने से जहां क्षेत्र का विकास होगा वहीं आवागमन भी सुगम होगा। पुराने पुल के देवरिया से जाते समय दाहिने तरफ बन रहा है। कोलकाता की भंगल कंपनी ने पुल बनाने का जिम्मा लिया है।
भागलपुर में सरयू नदी पर बना पुराना पुल जर्जर हो चुका है। पुराने पुल के छठवें पिलर के ज्वाइंट भारी वाहन गुजरते वक्त आधा फिट फैल जा रहा है इसके चलते हाईट गेज बैरियर लगाकर भारी वाहनों के लिए दो साल से बंद कर दिया गया है। वहीं भविष्य में इस पर दबाव और बढ़ सकता है। कुशीनगर के तमकुही राज और बलिया के सिकंदरपुर तक फोरलेन सड़क निर्माण से नये चौराहों का विकास होगा। रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। कुशीनगर, बिहार से सीधा यह पुल वाराणसी-बलिया को जोड़ेगा।
पुल बनने से इस रूट से 10 हजार से 20 हजार वाहनों का आवागमन होगा, जिससे यात्रा करने वाले लोगों को सहूलियत मिलेगी। एनएच के जेई सुमित कुमार ने बताया कि फोरलेन सड़क के साथ-साथ डबल लेन पुल का निर्माण बाढ़ की वजह से ठप था। पानी कम होने के बाद तेजी से कार्य चल रहा है।
पुराने पुल की स्थिति दयनीय: भागलपुर। 1987 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने पुराने पुल का शिलान्यास किया था।
2001 में बनकर तैयार हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने इसका लोकार्पण कर पुल को चालू कराया था। करीब 10 साल बाद ही पुल क्षतिग्रस्त हो गया। 2012 में पुल का मरम्मत कराया गया।
फिर 2016 में पुल के छठवें पाये की ज्वाइंट का गैप बढ़ गया। मरम्मत हुआ फिर चालू हुआ। 2019 में छठवें पाए के साथ मोबाइल ब्रिज मशीन से पुल की जांच की गई जांच के बाद आईआईटी के इंजीनियरों की देखरेख में एक बार फिर मरम्मत कराया गया।
2022 में पुल एक बार फिर डैमेज हो गया। दिल्ली आईआईटी के पुल विशेषज्ञ बीके रैना को बुलाया गया।
उन्होंने अपनी देखरेख में मरम्मत कराया लेकिन 2023 नवंबर में जब पुल पर भारी वाहन चलाकर ट्रायल हुआ तो छठवें पाये के ज्वाइंट का गैप स्प्रिंग की तरह फैल गया।