पूर्व एमएलसी की गिरफ्तारी प्रकरण में चार्जशीट दाखिल करने का मामला गहराया
एमपी-एमएल कोर्ट से लेकर सीजेएम न्यायालय तक चक्कर काटती रही पुलिस
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। पूर्व एमएलसी रामू द्विवेदी की गिरफ्तारी के प्रकरण में चार्जशीट दाखिल करने को लेकर मामला गहरा गया है। अभी तक अपराध संख्या गलत होने का मामला था, लेकिन अब क्षेत्राधिकार को लेकर पुलिस परेशान है। सोमवार को दिन भर पुलिस एमपी-एमएलए कोर्ट से लेकर सीजेएम न्यायालय तक चक्कर लगाती रही, लेकिन चार्जशीट दाखिल करने में उसे सफलता नहीं मिली।
वर्ष 2012 में कोतवाली में निकुंज अग्रवाल ने अपराध संख्या 2228/12 के तहत धारा 386, 232, 504,506 में पूर्व एमएलसी रामू द्विवेदी, उनके पीए व गनर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में शपथ पत्र देने के बाद पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट मुकदमा अपराध संख्या 2228/12 की जगह अपराध संख्या 2230/12 में लगाकर न्यायालय भेज दिया। उस समय किसी की भी नजर उस गलती पर नहीं पड़ी। अब नौ साल बाद पुलिस ने आनन-फानन पूर्व एमएलसी सहित चार लोगों को उसी मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जबकि गिरफ्तार तीन अन्य लोगों का इस मामले में नाम नहीं है, वहीं, तहरीर में नामजद पूर्व एमएलसी के पीए व गनर का पुलिस ने संज्ञान नहीं लिया और न ही चार्जशीट में जिक्र किया। पूर्व एमएलसी सहित चार की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने फिर गलती दोहराते हुए अपराध संख्या 2230/12 में न केवल जेल भेजा, बल्कि आरोप पत्र भी तैयार कर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय ने अपने रिकॉर्ड से मिलान किया तो गलती पकड़ में आई और चार्जशीट लौटा दी गई। इसके बाद तीन दिन तक पुलिस काफी मशक्कत की, लेकिन चार्जशीट दाखिल करने में कामयाबी नहीं मिली। सोमवार को पुलिस फिर चार्जशीट लेकर सीजेएम न्यायालय में पहुंची। सीजेएम ने एमपी-एमएलए न्यायालय के क्षेत्राधिकार में बताते हुए वापस कर दिया। उधर, एमपी-एमएलए न्यायालय में भी चार्जशीट दाखिल नहीं हो पाई। इसके चलते पूर्व एमएलसी की जमानत पर सुनवाई नहीं हो सकी। उधर, पुलिस अधिकारी इस मामले में कुछ बोलने से कतरा रहे हैं। उनका पक्ष मिलने पर प्रकाशित किया जाएगा।