सलेमपुर। ब्लॉक के पुरैना में चल रही रामलीला की पांचवें दिन बृहस्पतिवार की रात नगर दर्शन फुलवारी लीला का मंचन किया गया। लीला के प्रसंग अनुसार, मुनि विश्वामित्र से अनुमति लेकर श्रीराम लक्ष्मण के साथ जनकपुर देखने जाते हैं। दोनों भाइयों के जनकपुर पहुंचते ही इन्हें देखने के लिए लोग दौड़ पड़ते हैं। सखियां राम, लक्ष्मण के रंग रूप का आपस में बखान करती हैं। एक कहती है कि लगता है करोड़ों कामदेव की छवि को जीता है तो दूसरी कहती है कि हंस के बालकों के समान इनकी जोड़ी है। तीसरी सखी कहती है कि महाराज जनक को धनुष यज्ञ छोड़ जानकी का विवाह इसी वर से कर देना चाहिए। एक सखी कहती है कि महाराज का धनुष बहुत कठोर है और यह बालक बहुत कोमल हैं। सभी सखियां दुविधा में पड़ जाती हैं। दूसरी सखी इस शंका को दूर करते हुए कहती है कि जिसके चरणरज पाते ही अहिल्या पत्थर से स्त्री बन गईं क्या बिना शिव धनुष तोड़े रह पाएंगे। सखियां दोनों भाइयों पर पुष्प वर्षा करने लगती हैं। दोनों भाई विश्वामित्र के पास लौटकर शयन करते हैं। संवाद