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Deoria News: डाॅक्टर साहब का पर्चा सभी पढ़ पाएंगे, लिखनी होंगी जेनरिक दवाएं

Fri, 18 Aug 2023 11:57 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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देवरिया। अब डाक्टरों को मरीजों के इलाज के लिए दवाओं का पर्चा साफ-साफ लिखना होगा। जिससे मरीज या उनके तीमारदार दवा का नाम पढ़ सकें। इतना ही नहीं, जेनरिक दवाएं ही लिखनी होगी। इसको लेकर नेशनल मेडिकल कमीशन ने गाइड लाइन जारी की है।
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गाइडलाइन के मुताबिक यह नियम सभी पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टीशनर पर लागू होगा। मान्यता प्राप्त करने के बाद नेशनल मेडिकल कमीशन में रजिस्टर्ड होने वाले डॉक्टर इसमें आते हैं। इन डॉक्टरों के पर्चा का नमूना भी जारी किया गया है। इस पर डॉक्टर का नाम, पंजीकरण संख्या, आपातकालीन नंबर, रोगी का नाम, उम्र, श्रेणी आदि का भी जिक्र करना होगा।
अधिकांश डॉक्टर अपने पर्चे पर दवा का नाम साफ नहीं लिखते हैं। इसमें कुछ नाम तो पढ़ने में नहीं आते हैं, लेकिन मेडिकल स्टोर के संचालक पर्चा देखते ही समझ जाते हैं। कई बार मरीजों को किसी खास दवा के लिए दुकानों पर भटकना पड़ता है। पर एनएमसी की नई गाइड लाइन साफ है कि डॉक्टर पर्चे पर दवाओं का नाम स्पष्ट रूप से बड़े अक्षरों में लिखें। संभव हो तो नाम टाइप कराएं, जिससे मरीज और तीमारदार गलत दवा लेने से बच सकेंगे। इसके अलावा केवल जेनरिक दवा ही लिखनी होगी। गाइड लाइन में स्पष्ट किया गया है कि जेनरिक दवा ब्रांडेड दवाओं से 30 से लेकर 80 प्रतिशत तक सस्ती होती हैं। कुछ दवाएं ब्रांडेड जेनरिक की श्रेणी में हैं। वह ब्रांडेड से तो सस्ती होती हैं, लेकिन जेनरिक की महंगी होती हैं। इसलिए डॉक्टरों को चाहिए कि इस श्रेणी में केवल जेनरिक दवा ही मरीजों को लिखें। इसके अलावा ऐसी दवा का नाम लिखें, जो दवा की दुकानों पर आसानी से उपलब्ध हो।
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एनएमसी ने दिए हैं ये सुझाव
- केवल जेनरिक, गैर मालिकाना दवाओं का ही नाम लिखें
- तर्कसंगत और किफायती दवाएं लिखें
- दवाओं के दुष्प्रभाव को देखते हुए उतनी ही दवा लिखें, जितनी जरूरी हो
- निश्चित खुराक संयोजन का इस्तेमाल विवेकपूर्ण तरीके से करें
- दवा विक्रेताओं को समझाएं कि वे केवल जेनरिक दवाएं ही लिखें

- ब्रांडेड जेनरिक दवाएं लिखने से बचें
- ब्रांडेड और जेनरिक दवाओं की समानता के बारे में मेडिकल छात्रों, मरीज व जनता को बताएं

नए नियम के पीछे सोच सही हो सकता है पर तरीका गलत है। यह कार्य बिना सोचे-समझे किया जा रहा है। इससे मरीजों का नुकसान होगा। मौजूदा समय जेनरिक दवाओं की उपलब्धता नहीं है। पहले इसकी उपलब्धता व गुणवत्ता को सुनिश्चित किया जाए। ब्रांडेड कंपनियों की दवा व दर की जांच सरकार करे और गलत व मनमानी मिलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
डॉ. विपिन बिहारी शुक्ला, अध्यक्ष, नेशनल मेडिकल एसोसिएशन



दवा का नाम साफ लिखने का नियम ठीक है। पर सभी दवाओं का कंपोनेट लिखने में समय अधिक लगेगा। सिर्फ जेनरिक दवाएं लिखने का असर मरीजों की सुरक्षा पर पड़ता है। इससे हम मरीजों को मेडिकल स्टोर के भरोसे छोड़ देंगे। सिर्फ फार्मूला लिखने पर मेडिकल स्टोर संचालक कोई इस तरह की दवा दे सकता है, जो मर्ज को ठीक करने में पूरी तरह से कारगर न हो।
डॉ. केएम त्रिपाठी, सचिव, नेशनल मेडिकल एसोसिएशन
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मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों को पहले से जेनरिक दवा लिखने का निर्देश दिया गया है। अब दवा का नाम साफ लिखने को कहा गया है। सरकार के नियमों का पालन कराया जाएगा।
- डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस
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सीएचसी, पीएचसी के डॉक्टरों को जेनरिक दवा लिखने का नियम पहले से है। दवाओं का फार्मूला स्पष्ट लिखने के नियम का पालन कराया जाएगा। सरकार का ध्यान जेनरिक दवा से मरीजों हो फायदा पहुंचाने का है।
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- डॉ. राजेश झा, सीएमओ
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