देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी वार्ड का पता बदल गया है। मंगलवार से मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी सेवा पूर्ण वातानुकूलित ट्रामा सेंटर भवन में शिफ्ट कर दी गई। अब इमरजेंसी मरीजों का इलाज पुराने वार्ड के बजाय नए ट्रामा सेंटर में ही होगा।
मेडिकल काॅलेज में इमरजेंसी सुविधाओं को दोपहर में करीब तीन बजे ट्राॅमा सेंटर को शिफ्ट कर दिया गया। इससे पहले ट्रामा सेंटर में फंक्शनल बेड, मॉनिटर और अन्य सभी जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था बना दी गई थी।
इमरजेंसी पहुंच रहे मरीजों का पंजीकरण कर सामने नए बने ट्रामा सेंटर के भवन में भेजने का काम शुरू हो गया। ट्रामा सेंटर में दक्षिण तरफ बने ओपीडी गेट से प्रवेश दिया गया। यहां पर तैनात चिकित्सकों ने सबसे पहले मरीजों का प्राथमिक परीक्षण किया।
गंभीर मरीजों को सीधे माइनर ओटी में ले जाकर जांच शुरू कर दी गई। कुछ मरीजों को जांच के बाद सीधे ट्रामा सेंटर के इमरजेंसी वार्ड के एलो जोन में भेज दिया गया। यहां पर तैनात स्टॉफ ने मरीजों को उपचार दिया।
नवनिर्मित ट्रामा सेंटर में अधिक जगह है। इसमें इमरजेंसी के 16 की अपेक्षा अब 30 बेड उपलब्ध हैं। इमरजेंसी के वार्ड से शिफ्ट किए गए मरीजों को भर्ती करने के बाद भी बेड खाली रहे। इससे बाद में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को बेड आसानी से मिल गया। इससे मरीजों ने राहत की सांस ली। मुसैला मईल मार्ग पर स्थित वीरपुर मिश्र से आईं कलावती देवी को लो बीपी की समस्या के चलते परिजन लेकर आए थे। उन्हें तुरंत बेड मिल गया और उपचार शुरू होने से परिजन ने प्रसन्नता व्यक्त की। संवरेजी गांव से आए रमायन विश्वकर्मा को तुरंत चिकित्सकों ने देखा और इलाज शुरू कर दिया।
डॉक्टर ने रमायन से गिरकर चोटिल होने का कारण पूछा तो रमायन ने बताया कि यूं ही गिर गए थे। उन्हें बाद में स्ट्रेचर से सीधे वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। इधर स्टॉफ को भी काफी सहूलियत मिली। उमस भरी गर्मी में लोगों ने राहत की सांस लिया।
नए भवन में नई व्यवस्था के हिसाब से लगाई गई ड्यूटी : मेडिकल कॉलेज में व्यवस्थाओं के इस बदलाव से मरीजों को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत मिलेगी। नया भवन पूरी तरह एयर-कंडीशनर है। मरीजों के दबाव को देखते हुए बेड की संख्या भी दोगुनी कर दी गई है। पहले इमरजेंसी वार्ड में जहां सीमित बेड थे, वहीं अब ट्रामा सेंटर में मरीजों के लिए 30 बेड उपलब्ध करा दिए गए हैं। इमरजेंसी सेवा के ट्रामा सेंटर में स्थानांतरित होते ही व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने की कवायद शुरू हो गई है।
पहले ही दिन डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टॉफ और नर्सों का नया ड्यूटी रोस्टर तैयार कर लागू कर दिया गया। परिसर में सुरक्षा और हेल्प डेस्क पर भी कर्मियों की तैनाती कर दी गई है ताकि नए स्थान पर आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को किसी तरह की असुविधा न हो।