सोमवार को टांका कटवाने, चेकअप और दवा के लिए अस्पताल बुलाया गया था। परिजनों के अनुसार, महिला नर्स द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने के तुरंत बाद मरीज की तबीयत बिगड़ने लगी। कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई। मृतका के बेटे अब्दुल खुद्दश ने बताया कि उनकी मां स्वयं चलकर अस्पताल आई थीं। इलाज के दौरान न तो सतर्कता बरती गई और न ही डॉक्टर मौजूद था। मौत की खबर सुनते ही परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल में हंगामा करने लगे। सूचना पर शहर कोतवाल डीके सिंह फोर्स के साथ पहुंचे। उन्होंने स्थिति को नियंत्रित किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
डॉक्टर ने 1.20 लाख मांगे, रसीद तक नहीं दी
निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए कुल ₹1,20,000 की मांग की थी, इसमें से परिजन ने किसी तरह 70,000 जमा किए थे। लेकिन उन्हें इसकी कोई रसीद नहीं दी गई। 2 जुलाई को ऑपरेशन हुआ और तीन दिन बाद पैसे की मांगकर उसे छोड़ने की बात कही। परिजन ने बताया कि मैंने टांका कटवाने वाले दिन आकर पैसा जमा करने की बात कही तो मान गए। सोमवार को जैसे ही मैं पहुंचा, मुझसे पैसे की मांग की गई। डॉक्टरों ने पहले पैसे जमा करने का दबाव बनाया। इसके बाद ड्रेसिंग रूम में ले जाकर इंजेक्शन लगा दिया गया। परिजनों का आरोप है कि इंजेक्शन लगते ही महिला की तबीयत बिगड़ गई और इलाज के अभाव में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। उसने बताया कि मां खुद चलकर अस्पताल पहुंची थीं।
यह बोले जिम्मेदार-
शहर कोतवाल डीके सिंह ने बताया कि अबूबकर नगर मोहल्ले के एक अस्पताल में महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों की सूचना पर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। तहरीर मिली है जांच कर कार्रवाई की जाएगी।