शहर के गायत्रीपुरम मोहल्ला निवासी अमित की आर्यसमाज गली में दुकान है। इसी दुकान पर नेहा काम करती है। इसके पिता की भी दुकान है। पर अमित पिता से अलग हटकर रहता है। एक बार रुपये के लेन-देन में भी इसी की दुकान के पास बम से हमला भी किया गया था। पुलिस सूत्रों की बातों पर गौर किया जाए तो अमित के सोना तस्करों से गहरे ताल्लुकात हैं। वह काफी समय से इस धंधे में लिप्त है, जबकि दूसरी तरफ चर्चा है कि नेहा उसकी दुकान पर काम करती थी, जिसे कस्टम ने पूछताछ करने के बाद छोड़ दिया है।
इसे भी पढ़ें: खाने में कम मिली मछली: लड़कों ने मातम में बदल दीं शादी की खुशियां, दुल्हन के बाबा को पीट-पीटकर मार डाला
आभूषण की दुकानों में दिन दोगुना, रात चौगुना होती गई वृद्धि
शहर में करीब एक दशक पहले गिनी-चुनी सौ दुकानें हुआ करती थीं, लेकिन इस समय हालत है कि शहर में करीब दो हजार हो चुकी हैं, जबकि पूरे जनपद में इनकी संख्या दस हजार पहुंच चुकी है। सर्राफ के सम्मानित कार्य पर कुछ शातिर दाग लगाने का काम कर रहे हैं। डाई का काम करने वाले कुछ ऐसे भी युवक हैं, जो तस्करों से सोना खरीद कर गलाने का काम कमीशन पर करते हैं। इतना ही नहीं चोरी का माल भी कुछ दुकानदार खरीदते हैं। अभी कुछ दिन पहले एक दुकानदार को चोरी का माल खरीदने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
इसे भी पढ़ें: बेटियों को इंटरनेट से फंसा रहे चालबाज: रखिए ख्याल, बच्चियां नहीं जानतीं, वो दोस्त हैं या दरिंदे
पुलिस की भी है सेटिंग
करीब एक माह पहले भटनी जीआरपी ने चांदी के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। इस घटना के बाद चर्चा हुई थी कि पकड़े गए तस्कर के पास से सोना भी बरामद हुआ था, लेकिन वह कहां चला गया, इसके बारे में पता नहीं चल सका। इसके चलते एक बात तो साफ है कि ट्रेनों में हर वक्त मौजूद रहने वाली पुलिस की नजर आखिर सोना तस्करों पर क्यों नहीं पड़ रही है। इतना ही नहीं जिले की पुलिस को भी तस्करों के बारे में भनक तक नहीं लग पा रही है। एसओ जीआरपी सुधाकर उपाध्याय ने बताया कि ट्रेनों में चेकिंग के दौरान कई बार बदमाशों को पकड़ा जा चुका है। पकड़े गए तस्करों से कुछ सुराग मिले हैं, इस गिरोह के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।