कुएं से निकला है स्वयंभू शिवलिंग, पद्म पुराण में मिलता है उल्लेख
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संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। पौराणिक महत्व का दुग्धेश्वरनाथ मंदिर महाशिवरात्रि के महापर्व के लिए सजधज कर तैयार है। दूसरी काशी के रूप में विख्यात रुद्रपुर में दुग्धेश्वरनाथ का भक्त महाकाल के रूप में दर्शन करते हैं। इसकी व्याख्या पद्मपुराण में की गई है। महाशिवरात्रि पर हर वर्ष देश के कोने-कोने से शिवभक्तों का सैलाब उमड़ता है।
इस अवसर पर रुद्रपुर में सुरक्षा का विशेष इंतजाम किया गया है। मंदिर को सजा दिया गया है। शिवरात्रि से लेकर 13 दिन तक मंदिर पर तेरस का मेला लगेगा। मेले में दुकानें सज गई हैं।
उज्जैन स्थित महाकाल के ज्योर्तिलिंग के सदृश दुग्धेश्वरनाथ को पौराणिक मान्यता दी गई है। पद्मपुराण के अनुसार, महाकालस्य यद् लिंगम दुग्धेश मिति विश्रृतम अर्थात महाकाल के सदृश इस लिंग को दुग्धेश कहते हैं।
यहां शिवलिंग सामान्य धरातल से 20 फीट नीचे कुएं से निकला है। यह स्वयंभू शिवलिंग है। काशी की तर्ज पर बसे रुद्रपुर में तीर्थ पुरोहितों की बस्ती है। पुराण के अनुसार, यह हंस तीर्थ स्थल है। यहां कालांतर में ऋषि-महर्षि जप-तप और अनुष्ठान करते रहे हैं।
पौराणिक तीर्थ स्थल के पीछे स्थित ध्वस्त किला है। इस किले से देवी-देवताओं की बेशकीमती मूर्तियां प्राप्त होती रहती हैं। दुग्धेश्वरनाथ मंदिर क्षेत्र में सहनकोट किले से प्राप्त मूर्तियों को स्थापित किया गया है।
मंदिर परिक्षेत्र में स्थित भगवान गणेश और शिव पार्वती की नृत्य मुद्रा में काले पत्थर की मूर्ति 800 वर्ष पुरानी बताई जाती है। वहीं, काली और भगवान विष्णु की काले पत्थर की वामन मूर्ति भी इसी क्षेत्र से प्राप्त हुई थी।
ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के दुग्धेश्वरनाथ मंदिर से भक्तों की अटूट आस्था है। शिवरात्रि पर जिला प्रशासन की ओर से दुग्धेश्वरनाथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था का विशेष इंतजाम किया गया है।
रात्रि एक बजे से खुल जाएगा मंदिर का पट
एसडीएम रत्नेश तिवारी ने कहा कि आठ तारीख को महाशिवरात्रि के पर्व पर रात्रि एक बजे से ही दर्शन-पूजन और जलाभिषेक के लिए मंदिर का दरवाजा खोल दिया जाएगा। मंदिर के परिक्षेत्र और गर्भगृह में भक्तों की सुविधा के लिए व्यापक पुलिस बल लगाया गया है। मंदिर में प्रवेश दक्षिणी दरवाजे से होगा। भक्त गर्भ गृह में पश्चिमी दरवाजे से प्रवेश करेंगे। दर्शन के बाद भक्तों को पूर्वी दरवाजे से निकाला जाएगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से शिवरात्रि के दिन सोने के आभूषण पहन कर नहीं आने और शीशे के पात्र में दूध या जल नहीं लाने की अपील की।