एमडीआर मरीज चिह्नित होने पर प्री-ट्रीटमेंट ई वैल्यूएशन सुविधा से इलाज में होगी आसानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में क्षय रोग के मरीजों के लिए डीआरटीबी वार्ड स्थापित कर दिया गया है। अब टीबी के मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट (एमडीआर) मरीजों को प्री-ट्रीटमेंट ई वैल्यूएशन की सुविधा होगी। दो दिन तक मरीज को वार्ड में डॉक्टर की निगरानी में रखा जाएगा और दवा दी जाएगी। ताकि उसके साइड इफेक्ट्स के बारे में जानकारी हो सके। जरूरत पड़ने पर भर्ती कर इलाज किया जाएगा। अभी तक यह सुविधा नहीं थी, जिससे मरीजों को दूसरी जगह जाना पड़ता था। वार्ड के बनने से एमडीआर मरीजों के इलाज में सहूलियत होगी।
महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में सामान्य और एमडीआर टीबी के मरीज आते हैं। सामान्य मरीजों की पुष्टि होने के बाद दवा दी जाती है। पर एमडीआर और एक्सडीआर मरीज को जटिल टीबी कहा जाता है। एमडीआर मरीज के दवा की कोर्स 9 से 11 माह होती है। इन मरीजों को छह माह तक सात और चार माह तक पांच दवा खानी होती है। मरीज को डीआरटीबी वार्ड में भर्ती कर दवा देकर प्री-ट्रीटमेंट इवैल्यूएशन किया जाता है। दो दिन तक मरीज डॉक्टर की निगरानी में रहता है। इससे दवा का साइड इफेक्ट्स देखा जाता है। इसके बाद छुट्टी देकर नियमित दवा सेवन करने की सलाह दी जाती है। लेकिन, वार्ड न होने से मरीज को जांच के बाद टीबी क्लीनिक से दवा दी जाती थी या फिर मेडिकल कॉलेज गोरखपुर भेजा जाता था। इससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता था।
इसे प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार बरनवाल ने गंभीरता से लिया और वार्ड स्थापित करने की कार्ययोजना तैयार की। इसके बाद ओपीडी भवन के प्रथम मंजिल पर चार बेड का वार्ड स्थापित किया गया है। यहां मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। इसके बन जाने से मरीज को सहूलियत के साथ इलाज में आसानी हो रही है।
खतरनाक होती है बीमारी, खांसने, छींकने से फैलती है
देवरिया। सामान्य टीबी की पुष्टि होने के बाद कुछ लोग पूरा कोर्स दवा नहीं खाते हैं। दवा छोड़-छोड़कर खाने वाले एमडीआर टीबी की चपेट में आ जाते हैं। इसके दवा का कोर्स 9 से 11 माह तक होता है। इस श्रेणी के मरीज दवा खाने में लापरवाही बरतते हैं और छोड़-छोड़ कर खाते हैं तो बीमारी गंभीर हो जाती है और मरीज एक्सडीआर टीबी की चपेट में आ जाता है। इसमें एक अंग से दूसरे अंग में संक्रमण हो जाता है। इसका कोर्स 20 माह का होता है। टीबी की बीमारी में एमडीआर और एक्सडीआर खतरनाक होता है। यह मरीज के खांसने, छींकने, थूकने से स्वस्थ लोगों में फैलती है। एक बार खांसने पर मरीज 3500 बैक्टीरिया छोड़ता है, जिससे आसपास के लोग भी प्रभावित हो सकते हैं।
48 घंटे तक रखे जाते हैं मरीज
देवरिया। टीबी के मरीज की जांच में एमडीआर की पुष्टि होने के बाद उसे वार्ड में भर्ती किया जाएगा। यहां मरीज की स्पुटम, ट्रूनाट, ईसीजी, ऑडियोमेट्री, ब्लड, यूरीन की जांच कराई जाती है। इसके बाद दवा की खुराक दी जाती है। कुछ मरीजों में किसी-किसी दवा का दुष्प्रभाव हार्ट, आंख पर पड़ सकता है और प्लेटलेट्स कम हो जाता है। मरीज में यह देखा जाता कि किसी दवा का साइड इफेक्ट तो नहीं है। इसके बाद मरीज को दवा देकर भेज दिया जाएगा। मरीज को दो माह बाद फालोअप के लिए बुलाया जाता है।
इतने मिले एमडीआर मरीज
2020-21 में 218,
2021-22 में 210
2022-23 में 235
जनवरी 2024 से अब तक 51 मरीज मिले हैं।
कोट
मेडिकल काॅलेज में डीआरटीबी वार्ड स्थापित किया गया है। इससे मरीजों के इलाज में आसानी होगी। मरीजों को भी दिक्कत नहीं होगी। इस बीमारी को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। लक्षण मिलने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क कर जांच करानी चाहिए। पूरे कोर्स दवा लेने से बीमारी ठीक हो सकती है। अस्पताल में बलगम, ब्लड सहित अन्य जांच और दवा की निशुल्क सुविधा है।
-डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस