देसही देवरिया। मनुष्य अपनी विनम्र सोच, श्रद्धा, निष्पाप कर्म से अपने जीवन को महत्वपूर्ण व दूसरों के लिए भी उपयोगी बना सकता है। ईश्वर भी उसकी मदद करते हैं, जिसके विचार शुद्ध होते हैं। अहंकार और अनाधिकार चेष्टा, व्यक्ति को कभी चैन से जीने नहीं देती। अपने अंदर के प्रकाश पुंज को धूमिल न पड़ने दें। उक्त बातें नौतन हथियागढ़ गांव स्थित लालमन बाबा के स्थान पर चल रही 11 दिवसीय शतचंडी महायज्ञ के 10वें दिन श्रीधाम अयोध्या से आए कथावाचक पूज्य रमाशंकर शास्त्री ने श्रोताओं को अमृत कथा का रसपान कराते हुए कही। संवाद