महुआडीह के अमारी चौराहा पर इसी वाहन में मिला है डाक्टर जुनैद का शव।संवाद
सड़क किनारे एसयूवी में मिला डाक्टर का शव, हड़कंप
- महुआडीह थानाक्षेत्र क्षेत्र के अमारी चौराहा पर काली मंदिर का मामला
-गाड़ी में मिली शराब की बोतलें और सिगरेट के पैकेट, नाक से निकला था खून
संवाद न्यूज एजेंसी
देसही देवरिया। महुआडीह थानाक्षेत्र क्षेत्र के अमारी चौराहा पर काली मंदिर के पास सोमवार सुबह संदिग्ध हालात में एक एसयूवी में डॉक्टर की लाश मिली। अंदर से बंद गाड़ी का लॉक तोड़कर शव को निकाला गया। गाड़ी नंबर की मदद से मृतक के परिजनों के बारे में पता लगाया गया, जिसके बाद उसकी शिनाख्त हुई। शव की नाक से खून बहा था और गाड़ी में शराब और सिगरेट के पैकेट पड़े थे। डॉक्टर की हत्या हुई है या यह सामान्य मौत है, इसका पता लगाने के लिए पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
जानकारी के अनुसार, रविवार रात 10.30 से 11.00 बजे के बीच में कुछ लोगों ने क्रीम कलर का एक चारपहिया वाहन अमारी चौराहा पर काली मंदिर के पास सड़क किनारे रुकते हुए देखी। सोमवार सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे तक भी गाड़ी जब उसी हालत में वहां खड़ी रही, तो लोगों को शक हुआ। कुछ लोगों ने गाड़ी के अंदर झांक कर देखा तो उसमें एक व्यक्ति अचेत अवस्था में पिछली सीट पर पड़ा दिखा। इस पर लोगों ने पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस मौके पर पहुंच गई। वाहन के सभी दरवाजे अंदर से बंद थे। पुलिस ने लॉक तोड़ा तो अंदर व्यक्ति मृत पड़ा था। वाहन नंबर से पुलिस ने परिजनों का पता लगाया और उन्हें सूचना दी। कुछ ही समय में परिजन मौके पर पहुंच गए और शव की शिनाख्त डा. जुनैद महसिम सिद्दीकी (40) के रूप में की। डॉ. जुनैद मूलत: रामपुर कारखाना थानाक्षेत्र के विशुनपुरा गांव के रहने वाले थे और पत्नी अफसाना खातून और एक बेटे व बेटी के साथ गोरखपुर में रहते थे। हालांकि घरवाले जुनैद को भले डॉक्टर बता रहे हैं पर गांववाले इस पर संदेह खड़ा कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, जुनैद कुछ साल पहले घर से भाग गया था, जब लौटा तो उसने घरवालों से बताया कि वह डॉक्टर बन गया है, लेकिन वह कहां प्रैक्टिस करता है इस बारे में घरवालों ने कभी नहीं बताया। उधर, पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एसओ नवीन चौधरी ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वजह साफ हो पाएगी। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गाड़ी में डॉ. जुनैद के साथ और कौन था
पुलिस ने जब गाड़ी का लॉक तोड़ा तो डॉ. जुनैद का शव पिछली सीट पर पड़ा था। यानी यहां तक गाड़ी कोई और लेकर आया था। गाड़ी रविवार रात जब मंदिर के सामने खड़ी हुई, तब कुछ लोगों ने उसमें से तीन लोगों को निकलते देखा था। वे तीन लोग कौन थे और जुनैद को उस हालत में छोड़कर क्यों चले गए, यह सवाल उठ रहा है। वाहन के अंदर शराब और सिगरेट के पैकेट जिस तरह मिले, उससे भी यही लगता है कि गाड़ी में जरूर ही कोई और था। पुलिस का कहना है कि घरवालों ने जुनैद की हत्या को लेकर कोई आशंका नहीं जताई है। फिर भी पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
तीन भाइयों में सबसे बड़े थे जुनैद
रामपुर कारखाना थानाक्षेत्र के विशुनपुरा गांव के रहने वाले अफामुल्लाह सिद्दीकी ने दो शादियां की थीं। पहली पत्नी से उनकी चार संताने थी। तीन बेटे और एक बेटी। जुनैद उनमें सबसे बड़े थे। इसके बाद जावेद, तौहीद और बहन शाहीन। दूसरी शादी के कुछ महीनों बाद ही अफामुल्लाह की मौत हो गई। दूसरी पत्नी से कोई संतान नहीं है। माता-पिता की मौत के बाद जुनैद अपने हिस्से की जमीन बेच कर परिवार से अलग रहने लगे। हालांकि उनका भाई-बहन से संबंध अच्छा था लेकिन सौतेली मां से उनके रिश्ते अच्छे नहीं थे। सात साल पहले जुनैद ने तरकुलवा थाना क्षेत्र के दुबे टोला की रहने वाली अफसाना खातून से शादी की थी, जिससे उन्हें एक बेटा और एक बेटी हैं।