स्कूली बसों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जाता है।
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देवरिया। कुशीनगर में बृहस्पतिवार को हुए हृदय विदारक घटना ने सभी का दिल दहला दिया है। बावजूद इसके स्कूल संचालक सहित अन्य जिम्मेदार इससे सबक लेने को तैयार नहीं हैं। जिले के प्राइवेट विद्यालयों के वाहनों में बच्चों को ठूंस-ठूंस कर बैठाया जा रहा है। सबसे खतरनाक बात तो यह है कि अधिकांश प्राइवेट स्कूलों के वाहन अनफिट हो चुके हैं, जो कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं। परिवहन विभाग भी इन पर कार्रवाई करने के लिए बड़ी घटना के होने का इंतजार करता है।
देवरिया जिले में वर्तमान सत्र में 1353 मान्यता प्राप्त स्कूलों का संचालन हो रहा है। शहर में ऐसे सैकड़ों अवैध चारपहिया वाहन हैं, जो स्कूली वाहन के रूप में चल रहे हैं, लेकिन इनका रजिस्ट्रेशन स्कूली वाहन के रूप में नहीं हुआ है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार छोटे-बड़े वाहनों को मिलाकर प्राइवेट स्कूलों के 773 वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। खास बात यह है कि इनमें से करीब 200 स्कूली वाहन बिना फिटेनस प्रमाण पत्र के ही चल रही है। इसमें शहर के नामी-गिरामी स्कूलों के वाहन भी शामिल हैं। एआरटीओ प्रशासन राजीव चतुर्वेदी ने बताया कि अनफिट वाहनों में नवजीवन मिशन स्कूल, रायल एकेडमी, पीडी एकेडमी, यूनिवर्सल पब्लिक स्कूल, सेंट जेवियर्स हाईस्कूल रुद्रपुर, सत्यनारायण स्कूल मदनपुर, उदय एकेडमी भाटपाररानी, राजेश्वरी देवी स्कूल पथरदेवा, लिटिल फ्लावर स्कूल सलेमपुर की बसें व अन्य वाहन शामिल हैं।