देवरिया जिले का एकौना थाना काला पानी की सजा का स्थान बन गया है। जनपद में अनुशासनहीन पुलिस वालों का तबादला कप्तान सजा के तौर पर एकौना कर रहे है। करीब एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी अपनी आमद करा चुके हैं। पुलिस अधीक्षक ने बकायदा फरमान भी जारी कर रखा है।
एकौना थाना जिले का सबसे पिछड़ा थाना माना जाता है। दो नदियों के बीच स्थित यह थाना भौगोलिक रुप से दुरूह इलाके में है। इसकी सीमाएं गोरखपुर जनपद से सटी है। इस थाने में तैनाती से पहले पुलिसकर्मियों का होश उड़ जाते हैं। बाढ़ प्रभावित इस क्षेत्र में पानी की अहम समस्या है। जल प्रदूषित हो चुका है। मच्छरों का अंबार है। पांच किलोमीटर के रेंज में चाय-पानी की दुकान तक नहीं है।
बरसात के समय में यह थाना चारों तरफ से पानी से लबालब हो जाता है। शुद्ध पेय जल के लिए आठ किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। बरसात के समय पुलिस वालों को सबसे अधिक भय सांप और बिच्छुओं का रहता है। मुख्यालय से थाने की दूरी अधिक है हालांकि कुछ समय पहले थाने में जाने का रास्ता दुरुस्त हो गया है वर्ना जीप देख कर लोग पहचान जाते थें कि एकौना थाने का वाहन है। महकमे में कहा जाता है एकौना जाने के बाद अधिकांश पुलिसकर्मी बीमार पड़ जाते हैं, जिसमें अधिकांश मलेरिया और टाइफाइड से पीड़ित रहते हैं।
पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी ने महकमे में अनुशासन बनाए रखने के लिए नया फरमान जारी किया है। अनुशासन तोड़ने वाले पुलिस कर्मी सीधे एकौना भेजे जा रहे हैं। ताकि सजा के तौर पर एकौना से लौटने के बाद आदतों में सुधार हो सके। करीब एक दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी को एकौना थाने में भेजा जा चुका है।