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Deoria News: 38 में से मात्र 13 छात्रों का ही बना दिव्यांगता प्रमाणपत्र

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गौरी बाजार। केंद्र व प्रदेश सरकार की तरफ से दिव्यांग छात्रों की बेहतरी के लिए किए जा रहे प्रयास को विभागीय दांव पेंच पलीता लगा रहे हैं। मशीन से जांच के नाम पर 70 फीसदी दिव्यांग छात्रों को यह कहकर घर भेज दिया गया कि अब जांच जिला अस्पताल देवरिया मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में होगी, तब सर्टिफिकेट मिलेगा।
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टीम के इस फरमान से मायूस होकर दिव्यांग छात्रों के साथ उनके अभिभावक घर लौटे। शिक्षा विभाग ने टीम द्वारा की गई लापरवाही को उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। मंगलवार को ब्लाॅक संसाधन केंद्र गौरी बाजार पर जिला अस्पताल के चिकित्सकों की टीम दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनाने पहुंची। बेसिक शिक्षा विभाग के स्पेशल एजुकेटर द्वारा पहले से चिह्नित छात्रों एवं उनके अभिभावकों को प्रेरित कर केंद्र पर लाया गया। कुल 38 दिव्यांग छात्रों में से मात्र 13 का दिव्यांगता सर्टिफिकेट बनाया गया। अन्य को यह कहकर लौटा दिया कि इनका सर्टिफिकेट जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज गोरखपुर द्वारा मशीन से जांचकर बनाया जाएगा।
प्राथमिक विद्यालय घाघरा टोला की छात्रा नाजिया पुत्री किताबुद्दीन का एक हाथ शुरू से उठाता ही नहीं है। उसका भी सर्टिफिकेट मौके पर नहीं बनाया गया। अभिभावकों का कहना है कि जिला अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में गरीब अभिभावकों का शोषण होता है। स्पेशल एजुकेटर अभय शर्मा सहित मौके पर मौजूद अन्य चार एजुकेटर ने बताया कि बमुश्किल बच्चों को दूर-दूर से ब्लॉक संसाधन केंद्र पर लाया गया, लेकिन मशीन का अभाव बताकर उन्हें लौटा दिया गया, जिससे वे सभी मायूस हैं।
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सर्टिफिकेट बनाने पहुंची चिकित्सकों की टीम में डॉ. केशव प्रसाद, डॉ. इकबाल खान, डॉ. तैयब अली, सुनील कुमार एवं दीपक कुमार शामिल रहे। डॉ. तैयब अली एवं इकबाल खान ने बताया कि मौके पर मशीन एवं विशेष एक्सपर्ट चिकित्सक न होने के कारण इन दिव्यांग छात्रों को लौटाया गया। यदि यह जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज जाते हैं तो वहां इनकी सघन जांच कर सर्टिफिकेट बना दिया जाएगा।
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