देवरिया। सरकारी भूलेखों के कम्प्यूटरीकरण की प्रक्रिया ने खतौनी को और जटिल बना दिया है। लोगों के नाम में तो गड़बड़ियां हैं हीं, अंश का निर्धारण भी गड़बड़ है। किसी का हिस्सा नहीं दिख रहा है तो किसी का पहले से अधिक हिस्सा आ रहा है। परेशान लोग इसे दुरुस्त कराने को हर दिन तहसीलों का चक्कर काट रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने जमीन के विवाद खत्म करने को भूलेखों को अपडेट करने और कम्प्यूटरीकृत कराने का अभियान शुरू किया है, जिससे कि लोग घर बैठे अपने भूलेख चेक कर लें या उसे जरूरत पड़ने पर प्रिंट कर लें। लेकिन करीब एक साल बाद भी यह प्रक्रिया उलझी हुई है।
खतौनी के अंश निर्धारण में हुई गड़बड़ियों के लिए प्रशासन ने 31 मार्च की डेट लाइन तय कर रखी है। इसके लिए हर लेखपाल को अपने कार्यक्षेत्र के गांव में कैंप लगाकर उसी दिन सारी गड़बड़ियों को ठीक करना था, लेकिन अभी करीब 60 फीसदी खतौनी में ही अंश निर्धारण की गलतियाें को सुधारा जा सका है। भाटपार रानी संवाद के अनुसार तहसील में लगभग एक माह से सुधार की प्रक्रिया जारी है। फिर भी किसानों को चक्कर लगाना पड़ रहा है। प्रभारी तहसीलदार अभिजीत प्रताप सिंह ने बताया कि जिन किसानों का नाम सुधार और अंक सुधार कराना है उन्हें अपना आधार कार्ड और परिवार रजिस्टर का नकल लाकर हल्का लेखपाल के पास जमा करना पड़ रहा है।
लेखपाल की रिपोर्ट आने के बादउसका सुधार कर खतौनी में आदेश चढ़ा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके लिए एक रजिस्टर भी रखा गया है जिसमें अब तक कितना सुधार हुआ इसका लेखा-जोखा रखा गया है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन लगभग 15 मामलों का निपटारा किया जा रहा है।
मौके पर मिले किसान विजय बहादुर ,रामाधार प्रसाद, रामप्रवेश, तपेश्वर आदि ने बताया कि सुधार के लिए बड़ी मुसीबत लेखपाल को खोजना है। लेखपाल बताते हैं कि उनके पास काम की अधिकता है। इसलिए पहले उनके पास रिपोर्ट लगवाने को चक्कर लगाना पड़ रहा है, फिर तहसील आना पड़ता है।
गलतियों के कारण प्रभावित हो रही फार्मर रजिस्ट्री : रुद्रपुर। किसानों का मालिकाना हक प्रमाणित करने का दस्तावेज खतौनी में खामियों की भरमार के चलते फार्मर रजिस्ट्री का काम काफी प्रभावित है। अंश निर्धारण एवं नाम में गड़बड़ी के कारण फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है।
खामियों को दूर करने के लिए तहसील परिसर में हेल्प डेस्क बनाया गया है।फार्मर रजिस्ट्री के लिए बनाए गए हेल्प डेस्क पर 16 राजस्व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। जिसमें प्रतिदिन तीन लेखपाल और एक कानूनगो किसानों के सहयोग में काम कर रहे हैं। फार्मर रजिस्ट्री कराने के लिए आधार कार्ड और खतौनी की नकल के साथ ऑनलाइन आवेदन करना है। खतौनी और आधार कार्ड के नाम में अंतर होने पर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है।
अंश निर्धारण में गड़बड़ी के कारण भी काफी कठिनाई उत्पन्न हो रही है। इस कारण फार्मर रजिस्ट्री का काम काफी धीमा है। भविष्य में किसानों के कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से ही होगा।
जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री हो जाएगी उन्हें एक कार्ड मुहैया कराया जाएगा। जिसके आधार पर किसानों को सम्मान निधि, खाद बीज, कृषक ऋण आदि मिलेगा। फार्मर रजिस्ट्री कराने के लिए आए किसान मदन यादव, केशव यादव, नीरज पांडेय, गोबरी प्रसाद, अभय चंद आदि ने बताया कि खतौनी में काफी त्रुटियां हैं।
खतौनी में दर्ज किसानों के नाम और आधार कार्ड में अंतर होने के कारण रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। खतौनी में अंश निर्धारण में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी है। खतौनी की गड़बड़ी को ठीक करने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना पड़ रहा है। तहसीलदार चंद्रशेखर वर्मा ने बताया कि किसानों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क पर रोज तीन लेखपाल और एक राजस्व निरीक्षक तैनात रहेंगे। यह लोग किसानों का ऑनलाइन आवेदन करने में सहयोग करेंगे। किसान हेल्प डेस्क की मदद लेकर अपनी खतौनी ठीक करा सकते हैं। हेल्प डेस्क हर वर्किंग डे पर संचालित होगा।