पकडे गए जालसाज अश्वनी श्रीवास्तव और मुक्तीनाथ।
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एसटीएफ गोरखपुर की इकाई ने दो शिक्षकों को किया गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक की नौकरी दिलाने वाले गिरोह के दो सदस्यों को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। दोनों जाली प्रमाण पत्रों के आधार पर सिद्धार्थनगर और गोरखपुर जिले के अलग-अलग स्कूलों में नौकरी कर रहे हैं। इसके पास से हापुड़ की एक यूनिवर्सिटी की मुहर व प्रमाण पत्र भी मिले हैं। पूछताछ में दोनों जालसाजों ने गिरोह के सरगना राकेश सिंह के साथ दर्जनों फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कर नौकरी दिलाने की बात स्वीकार की। इसमें से कई शिक्षक जिले में ही तैनात हैं।
एसटीएफ गोरखपुर इकाई के इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश सिंह के नेतृत्व में टीम ने गुरुवार रात शहर कोतवाली दानोपुर गांव में पहुंची। मुखबिर के इशारे पर टीम ने दो लोगों को मौके से हिरासत में लिया। पूछताछ में उनकी पहचान अश्वनी कुमार श्रीवास्तव निवासी बरडीहा खुखुंदू और मुक्तिनाथ निवासी दानोपुर के रूप में हुई। तलाशी में उनके पास से कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, गौरीबाजार बीईओ व एक यूनिवर्सिटी की मुहर, जाली दस्तावेज व अन्य सामान बरामद हुए। एक कार भी मिली, जिसके कागजात उनके पास नहीं थे। अश्वनी कुमार ने बताया कि वह सिद्धार्थनगर जिले के भनवापुर ब्लाक अंतर्गत पूर्व माध्यमिक विद्यालय सरोधर कठौतिया में अश्वनी कुमार पुत्र कुंवरपाल के नाम पर नौकरी कर रहा है, जबकि उसके पिता का असली नाम लक्ष्मीशंकर श्रीवास्तव है। एक दोस्त ने यह अश्विनी कुमार का प्रमाण पत्र दिया था। बाद में उसी नाम से जाली पहचान पत्र बनाकर उसने नौकरी पा ली। उधर, मुक्तिनाथ ने बताया कि वह बड़हलगंज के पूर्व माध्यमिक विद्यालय पौहरिया राव में तैनात है। अश्वनी की सहायता से उसने बीएड का फर्जी अंकपत्र बनाया था। अश्वनी और मुक्तिनाथ मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे, फिर सेटिंग कर नौकरी दिलाते थे। उन्होंने सिद्धार्थनगर से गिरफ्तार सरगना राकेश सिंह से वर्ष 2010 के पहले से ही संपर्क में होने की बात कही। दोनों फर्जी शिक्षकों से पूछताछ के बाद एसटीएफ ने सदर कोतवाली पुलिस को सौंप दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ जालसाजी, जाली दस्तावेज बनाने सहित अन्य मामलों में केस दर्ज किया है।