संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। श्रवण मास में दुग्धेश्वरनाथ मंदिर पर आ रहे श्रद्धालुओं को पुराण और इतिहास का एक साथ दर्शन हो रहा है। पद्मपुराण में दुग्धेश्वर नाथ मंदिर की व्याख्या की गई है, वही मंदिर के पीछे ऐतिहासिक सहनकोट परिक्षेत्र आठवीं शताब्दी का धरोहर है।
दुग्धेश्वरनाथ मंदिर को हंस तीर्थ स्थल कहा जाता है। यहां कालांतर में मूर्ति कला का केंद्र रहा है। मंदिर परिसर में ऐतिहासिक सहनकोट परिक्षेत्र से प्राप्त दुर्लभ और बेशकीमती देवी देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। करीब पांच किली में फैले सहनकोट परिक्षेत्र में आठवीं शताब्दी का इतिहास मिलता है। सहनकोट आठवीं शताब्दी के किसी राजा का ध्वस्त किला है। जो पुरातत्व विभाग की ओर से संरक्षित है। इस क्षेत्र से पुरातात्विक महत्व की प्रतिमाएं और चिह्न प्राप्त होते रहते हैं।
काले पत्थर की गणेश,शिव पार्वती और मां काली की प्रतिमा इसी क्षेत्र से मिलीं है।