बारिश से उफनाए नदी-नालों ने सोमवार को पांच और जानें ले लीं। अलग-अलग क्षेत्रों में दो बच्चों समेत डूबे पांचों की लाश घंटों मशक्कत के बाद निकाली गई। एक सप्ताह में अब तक दस लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है।
चकसराय बदलदास बदली गांव निवासी ईश्वर दयाल का पुत्र बिट्टू (10) सोमवार की शाम अपने दोस्त हिमांशु (9) पुत्र विनोद के साथ गांव के बाहर बरसात के पानी से भरे खेत में नहाने गया था। इसी दौरान पैर फिसलने से बिट्टू खेत के बगल में बने गहरे गड्ढे में चला गया। उसे डूबता देख हिमांशु उसे बचाने के लिए बढ़ा तो वह भी डूबने लगा। शोर-गुल सुनकर गांव के लोग खेत की ओर दौड़े। ग्रामीण जब तक दोनों बच्चों को गड्ढे से निकालने का प्रयास करते वे डूब चुके थे। काफी प्रयास के बाद बच्चों के शव निकाले गए।
उधर, रामपुर कारखाना थानाक्षेत्र के महुआडीह चौकी क्षेत्र के हरैया बसंतपुर गांव निवासी करन सिंह (18) कुछ साथियों के साथ सोमवार को गांव के पश्चिम कुर्ना नाले में नहा रहा था। रसूलपुर गांव जाने वाले पुल पर युवक रस्सी के सहारे छलांग लगा रहे थे। इसी दौरान रस्सी टूट गई और करन पानी के तेज बहाव में बह गया। साथियों ने काफी प्रयास किया, लेकिन उसे ढूंढने में नाकाम रहे। चौकी इंचार्ज राममोहन सिंह की सूचना पर तहसीलदार सतीश व प्रभारी एसओ राजेश सिंह पहुंचे। गोताखोरों की मदद से करीब तीन घंटे बाद पुल से करीब 50 मीटर आगे करन का शव मिला। तीन भाइयों में सबसे छोटा करन 10वीं का छात्र था। पिता भोला सिंह, मां जयमती, भाई प्रदीप सिंह, अमिश और बहन कांति का रो-रोकर बुरा हाल है।
खामपार थाना के ग्राम बड़हरिया के पास सोमवार की दोपहर में ग्राम बंगरा बाजार के संबल टोला निवासी काशीनाथ कुशवाहा का बेटा राजेश कुशवाहा (16) एक अन्य युवक के साथ गाय को लेकर स्याही नदी पार कर रहा था। ग्राम बड़हरिया के पास नदी पार करते समय गाय अचानक राजेश को लेकर गहरे पानी में चली गई। उसे डूबता देख साथी युवक ने शोर मचाया। ग्राम प्रधान संदीप यादव ने ग्रामीणों की मदद से नदी में डूबे युवक की तलाश शुरू कराई। घंटों मशक्कत के बाद राजेश का शव निकाला गया।
इसी क्रम में चटिया गांव में सोमवार को दोस्तों के साथ तालाब में नहाने गए युवक की मौत हो गई। मछुआरों की मदद से शव को दो घंटे बाद निकाला गया। बसंत प्रसाद का
बेटा अंकुश (18) सुतावर इंटर कॉलेज में इंटर का छात्र था। सोमवार को गांव के चार दोस्तों के साथ तालाब में स्नान करने गया था। इसी दौरान वह गहरे पानी में चला गया। उसे डूबता देख दोस्तों ने शोर मचाया। ग्रामीण तालाब की ओर दौड़े और बचाव की कोशिश की, लेकिन तब तक अंकुश डूब चुका था। बेटे की मौत के बाद मां गौरी देवी बदहवास थीं। अंकुश तीन बहनों और एक भाई से बड़ा था। बहन अंशु, मंशु, सोनाली व भाई सौरभ का रोते-रोते बुरा हाल है। पिता बसंत प्रसाद मुंबई से घर के लिए रवाना हो गए हैं।