बारिश के बाद धान की फसलों में यूरिया की दरकार
किसान बोले-पहले बारिश कम से ही फसलें हुईं प्रभावित, अब यूरिया की किल्लत से पड़ रहा जूझना
खुखुंदू। क्षेत्र की समितियों और बाजारों से यूरिया गायब है। इससे किसानों में हाहाकार मची हुई है। बारिश के बाद धान की फसल में यूरिया की जरूरत है। ऐसे में यूरिया की किल्लत से किसान परेशान हैं। किसानों का कहना है कि एक तरफ जहां बारिश कम होने से धान की फसलें पहले से ही प्रभावित हुई है, वहीं अब उर्वरक ही उपलब्ध नहीं है।
खुखुंदू क्षेत्र के बी पैक्स समितियों पर इन दिनों एक छटाक यूरिया उपलब्ध नहीं है। यही हाल कस्बे समेत आसपास बाजारों में भी है। यूरिया के लिए चहुंओर हाहाकार मचा हुआ है। दो दिन से लगातार बारिश होने से किसानों को धान की फसलों में यूरिया देने की जरूरत आन पड़ी है। ऐसे में यूरिया की किल्लत किसानों को रुलाने लगी है।
किसान क्षेत्र के समितियों पर यूरिया के लिए चक्कर लगा रहे हैं। किसान कमलेश राय, नथुन राय, अशोक राय, दरोगा राय, जितेंद्र दीक्षित, राजेंद्र प्रसाद, रामप्रसाद राय, रामछपित यादव आदि का कहना है कि बारिश के बाद धान की फसल के लिए यूरिया बेहद जरूरी है, मगर कहीं भी एक छटाक यूरिया उपलब्ध नहीं है। बी पैक्स अघैला परसिया के सचिव प्रभुनाथ कुशवाहा ने बताया कि एक सप्ताह से यूरिया नहीं है। किसान समिति से खाली लौट जा रहे हैं।
बी पैक्स खुखुंदू, अघैला परसिया, श्रीनगर बरडीहा, मझवलिया, जमुना खेमकरण, बभनी सकरापार, पड़री पांडेय और नूनखार में एक छटाक यूरिया उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा खुखुंदू समेत आसपास के बाजारों की दुकानों पर भी यूरिया नहीं है। किसानों का कहना है कि समय रहते अगर यूरिया नहीं उपलब्ध हुआ तो कुछ फसल बारिश के अभाव में बर्बाद हो गई और बची-खुची फसलें भी यूरिया के अभाव में बर्बाद हो जाएंगी।
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यूरिया के लिए उमड़ी भीड़, धक्का-मुक्की और हंगामा
रामपुर बुजुर्ग/ बनकटा। बनकटिया स्थित यूपी कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड केंद्र पर बृहस्पतिवार को यूरिया के लिए किसानों की जबरदस्त भीड़ उमड़ पड़ी।करीब पांच सौ किसान सुबह से लाइन में लगे रहे। भीड़ बढ़ने पर लाइन व्यवस्था ध्वस्त हो गई और धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
यूरिया की कमी और धीमी गति से वितरण से किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। किसानों का आरोप है कि मनमाने तरीके से यूरिय बांटी जा रही है। हर किसी को बराबर नहीं मिल पा रही। इस दौरान एसआई शेषनाथ कनौजिया मौके पर मौजूद रहे, मगर अफरातफरी के बीच मूकदर्शक बने रहे। किसानों ने प्रशासन से मांग की कि पर्याप्त यूरिया उपलब्ध कराई जाए और वितरण व्यवस्था सुधारी जाए।