गौरी बाजार। डेढ़ दशक से बंद पड़ी वीरान चीनी मिल के परिसर में रविवार को एकत्रित श्रमिकों एवं किसानों के बीच जब सदर विधायक डाॅ. शलभ मणि त्रिपाठी पहुंचे तो उनका दर्द छलक पड़ा। श्रमिकों ने बकाया भुगतान के लिए विधायक से पहल करने की मांग की। विधायक ने उनकी बात गंभीरता से सुनी एवं हर संभव मदद करने का जब आश्वासन दिया।
गौरी बाजार चीनी मिल के अतीत पर नजर डालें तो जब इस क्षेत्र के गन्ने की मिठास की खुशबू अंग्रेजों को लगी तो उन्होंने वर्ष 1914 में इस क्षेत्र में चीनी मिल की स्थापना की। इस क्षेत्र के लोगों को जहां रोजी-रोजगार मिला तो वहीं किसान खुशहाल हो गए। इसी बीच सन 1998 में चीनी मिल बंद हो गई। तत्कालीन सांसद ले. जनरल प्रकाश मणि त्रिपाठी के प्रयास से मिल दो महीने और चलकर हमेशा के लिए बंद हो गई। सरकार बदल गई, जनप्रतिनिधि भी बदल गए, लेकिन नहीं बदल पाई चीनी मिल की तस्वीर। वर्ष 2011 में बीसीसीआई ने चीनी मिल की देश की राजधानी नई दिल्ली में नीलामी की। इसमें राजेंद्र इस्पात कोलकाता द्वारा मिल इस शर्त के साथ खरीदी गई कि किसानों एवं श्रमिकों का समस्त बकाया भुगतान करके वे यहां उद्योग चलाएंगे।
राजेंद्र इस्पात द्वारा श्रमिकों का भुगतान न कर चीनी मिल के जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया गया। इस बाबत विभिन्न न्यायालय में मुकदमा दायर किया चीनी मिल परिसर से उन्हें हटा दिया। तब से लेकर आज तक चीनी मिल श्रमिक एवं कुछ किसान प्रत्येक रविवार को चीनी मिल परिसर में आकर बैठक करते हैं, और घर चले जाते हैं। रविवार को जब सदर विधायक उनके बीच पहुंचे तो उनका दर्द छलक पड़ा। साथ ही उनके बीच कुछ उम्मीद की किरण फिर से जग उठी।
उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन विधायक को सौंपा तथा यह मांग किया कि समस्त बकाया भुगतान कर चीनी मिल की जमीन को सरकार अधिग्रहित करते हुए इस पर उद्योग लगाए। जिससे इस क्षेत्र का विकास हो सके। इस बाबत विधायक ने हर संभव मदद करने का आश्वासन दिया।